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रजिस्ट्री कार्यालयों में बढ़ेगी पारदर्शिता, तकनीक आधारित सेवाओं पर जोर; सीएम योगी ने दिए बड़े निर्देश

On: June 8, 2026
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रजिस्ट्री कार्यालयों में बढ़ेगी पारदर्शिता, तकनीक आधारित सेवाओं पर जोर; सीएम योगी
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08 जून 2026|लखनऊ: उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री कार्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और नागरिकों के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभाग की व्यवस्थाएं राज्य की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की जरूरतों के अनुरूप विकसित की जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय ऐसे सरकारी संस्थान हैं, जहां आम नागरिकों का सबसे अधिक प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसलिए इन कार्यालयों में पारदर्शिता, तकनीक और जनसुविधा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता भी जताई।

हर साल 2.4 करोड़ लोगों का रजिस्ट्री कार्यालयों से जुड़ाव

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में हर वर्ष करीब 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कार्यालयों में हेल्प डेस्क, टोकन और क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष तथा डिजिटल सेवाओं जैसी सुविधाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाएं। उनका कहना था कि नागरिकों को अनावश्यक इंतजार और असुविधा से बचाने के लिए सेवा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाना होगा।

राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, सेवा गुणवत्ता पर भी फोकस

बैठक में विभाग की आय और कार्यों की प्रगति का भी विवरण प्रस्तुत किया गया। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016-17 में स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या भी 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि राजस्व वृद्धि के साथ-साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

डिजिटल गवर्नेंस बने विभागीय सुधारों का आधार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आने वाले समय में डिजिटल गवर्नेंस ही विभागीय सुधारों की सबसे मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने संपत्ति और विवाह पंजीकरण प्रक्रियाओं में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक एवं आईरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज जांच और खतौनी आधारित डिजिटल सत्यापन व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने पेपरलेस रजिस्ट्रेशन सिस्टम, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कार्यप्रणाली और जियो-टैगिंग तकनीक के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के व्यापक उपयोग से पारदर्शिता बढ़ेगी, विवादों में कमी आएगी और राजस्व अपवंचन पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

संपत्ति मूल्यांकन में एकरूपता लाने की तैयारी

बैठक में संपत्तियों के मूल्यांकन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बाजार आधारित मूल्यांकन व्यवस्था लागू होने से मूल्य निर्धारण से जुड़े विवाद कम होंगे और आम लोगों को भी अधिक स्पष्टता मिलेगी।

निवेश और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के प्रमुख निवेश और औद्योगिक विकास केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। ऐसे में कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि स्पष्ट नियम और पारदर्शी प्रक्रियाएं निवेशकों का विश्वास मजबूत करती हैं। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होती है और कारोबार करने की सुगमता को बढ़ावा मिलता है।

स्टाम्प शुल्क व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने के निर्देश

समीक्षा बैठक में कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में बदलाव, आवासीय सहकारी समितियों और रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों के लिए स्पष्ट, व्यावहारिक और निवेश-अनुकूल स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन कर ऐसा विधिक ढांचा तैयार करने को कहा, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूती मिले, निवेश को प्रोत्साहन मिले, विवाद कम हों और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित बने रहें।

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