वाराणसी, 02 अप्रैल 2026। काशी की सांस्कृतिक धरती एक बार फिर इतिहास और परंपरा के संगम की साक्षी बनने जा रही है। “सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य वाराणसी” के जरिए भारत के गौरवशाली अतीत को जीवंत करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस भव्य आयोजन का संयुक्त रूप से शुभारंभ करेंगे।
तीन दिवसीय इस आयोजन का मंचन 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी के बीएलडब्ल्यू मैदान में होगा। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, परंपरा और वैज्ञानिक सोच को एक साथ प्रस्तुत करने का प्रयास है—जहां अतीत की विरासत आधुनिक मंच पर सांस लेती नजर आएगी।
इतिहास और विज्ञान का अनोखा संगम
“सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य वाराणसी” का उद्देश्य केवल एक राजा की गाथा सुनाना नहीं है, बल्कि उस युग की वैज्ञानिक सोच, विशेषकर विक्रम संवत की सटीकता और प्रासंगिकता को आम लोगों तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि भारतीय कालगणना प्रणाली कितनी समृद्ध और व्यवस्थित रही है।
करीब 1 घंटा 45 मिनट के इस महानाट्य में 175 से अधिक कलाकार मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे। भव्य सेट, पारंपरिक वेशभूषा और नाटकीय प्रस्तुति के जरिए दर्शकों को इतिहास के उस दौर में ले जाने की तैयारी है, जिसे अक्सर किताबों तक सीमित समझा जाता है।
बाबा विश्वनाथ को समर्पित होगी वैदिक घड़ी
इस आयोजन का एक खास आकर्षण वैदिक घड़ी भी होगी, जिसे काशी में काशी विश्वनाथ मंदिर को समर्पित किया जाएगा। यह घड़ी भारतीय कालगणना की पारंपरिक पद्धति को आधुनिक डिजिटल तकनीक के साथ जोड़ती है—एक तरह से यह अतीत और वर्तमान के बीच सेतु का काम करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 अप्रैल को शाम करीब 5:30 बजे वाराणसी पहुंचेंगे और रात 7 बजे बीएलडब्ल्यू ग्राउंड में महानाट्य का अवलोकन करेंगे। अगले दिन, 4 अप्रैल की सुबह वे काशी के कोतवाल कालभैरव मंदिर और बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी करेंगे।
काशी में तीन दिन तक सांस्कृतिक उत्सव
3 से 5 अप्रैल तक चलने वाला यह आयोजन केवल नाट्य मंचन तक सीमित नहीं रहेगा। आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी, जहां भारत के इतिहास, संस्कृति और विज्ञान से जुड़ी जानकारियां प्रस्तुत की जाएंगी।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा यह आयोजन सांस्कृतिक सहयोग और विरासत संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के बीच इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है—जैसे काशी खुद अपने इतिहास को फिर से जीने के लिए तैयार हो।
काशी की फिजाओं में इन दिनों एक अलग ही हलचल है—घाटों से लेकर गलियों तक, हर जगह इस भव्य आयोजन की चर्चा है। लोगों को उम्मीद है कि यह महानाट्य न केवल मनोरंजन करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी काम करेगा।








