नई दिल्ली/5 नवंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनिवार्य ग्रामीण सेवा के मुद्दे पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को अहम निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने आयोग से इस विषय की जांच करने और आवश्यक पहलुओं पर विचार करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। अदालत के इस निर्देश से मेडिकल छात्रों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
MBBS के बाद अनिवार्य ग्रामीण सेवा पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
बुधवार को न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने वाले डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा का मुद्दा उठाया गया था।
पीठ ने कहा, “हम एनएमसी को निर्देश देते हैं कि वह एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने वाले डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा के मुद्दे की जांच करे।”
अदालत के इस आदेश का मतलब है कि अब एनएमसी इस विषय पर विचार करेगी। हालांकि, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा लागू करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।
कर्नाटक के मेडिकल छात्रों की याचिका से जुड़ा है मामला
यह मामला कर्नाटक के एक डीम्ड विश्वविद्यालय में निजी सीटों पर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले कुछ छात्रों की याचिका से संबंधित है। मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई थी।
याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा आयुक्त से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें अनिवार्य ग्रामीण सेवा के संबंध में शपथ-पत्र देने के लिए बाध्य किए बिना एनओसी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
इस मांग के पीछे छात्रों की यह चिंता है कि ग्रामीण सेवा से जुड़ी शर्तों के कारण उनकी आगे की पढ़ाई या करियर संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता का मुद्दा भी अहम
देश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता लंबे समय से एक महत्वपूर्ण विषय रही है। कई क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की कमी की समस्या सामने आती रही है।
अनिवार्य ग्रामीण सेवा की व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण आबादी तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना माना जाता है। दूसरी ओर, मेडिकल छात्रों के लिए ऐसी सेवा की शर्तें उनकी शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत विकल्पों से भी जुड़ी होती हैं।
ऐसे में एनएमसी के विचार-विमर्श के दौरान ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत और मेडिकल छात्रों के हितों के बीच संतुलन का पहलू महत्वपूर्ण हो सकता है।
8 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर के लिए निर्धारित की है। अब एनएमसी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और ग्रामीण सेवा से संबंधित नियमों पर क्या विचार सामने आते हैं, इस पर मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्य क्षेत्र की नजर रहेगी।
फिलहाल अदालत का निर्देश अनिवार्य ग्रामीण सेवा के मुद्दे की जांच तक सीमित है। किसी नए नियम या देशव्यापी अनिवार्यता को लागू करने के संबंध में अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा।










