नई दिल्ली/15 अगस्त 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। इस दौरान उनके भाषण के साथ-साथ उनका पारंपरिक पहनावा भी चर्चा में रहा। सफेद कुर्ते और चॉकलेट ब्राउन जैकेट के साथ पीएम मोदी लाल टाई-एंड-डाई रंग की ‘बंधेज’ पगड़ी पहने नजर आए। राजस्थानी और गुजराती परंपराओं से जुड़ी इस पगड़ी में भारतीय संस्कृति की विविधता और पारंपरिक रंगों की झलक दिखाई दी।
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की ‘बंधेज’ पगड़ी ने खींचा ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार अपने परिधान में पारंपरिक भारतीय रंगों को खास जगह दी। सफेद कुर्ते के ऊपर चॉकलेट ब्राउन रंग की जैकेट और सिर पर लाल बंधेज पगड़ी का संयोजन अलग नजर आया। इसके साथ उन्होंने केसरिया, हरे और सफेद रंग के तीन पॉकेट स्क्वायर भी लगाए थे।
बंधेज भारत की पारंपरिक टाई-एंड-डाई कला से जुड़ी शैली है, जिसका राजस्थान और गुजरात की सांस्कृतिक परंपराओं में खास स्थान है। ऐसे में पीएम मोदी का यह पहनावा केवल रंगों का चुनाव नहीं, बल्कि देश की क्षेत्रीय विरासत को सार्वजनिक मंच पर सामने लाने का एक अंदाज भी माना जा सकता है।
पगड़ी में दिखती है भारत की सांस्कृतिक विविधता
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री की पगड़ी पिछले कुछ वर्षों में उनके पहनावे का एक खास हिस्सा बन चुकी है। वर्ष 2014 से लेकर अब तक अलग-अलग स्वतंत्रता दिवस समारोहों में उनकी पगड़ियों के रंग, डिजाइन और शैली बदलते रहे हैं।
कभी किसी क्षेत्र की पारंपरिक शैली नजर आई तो कभी किसी खास रंग और कपड़े ने ध्यान खींचा। इस बदलाव में भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं की झलक दिखाई देती है। यही वजह है कि लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन शुरू होने से पहले उनके पहनावे पर भी लोगों की नजर रहती है।
हर साल बदलता है अंदाज, कायम रहती है परंपरा
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पगड़ी अब एक तरह की दृश्य परंपरा बन गई है। हर साल पगड़ी के जरिए अलग रंग और क्षेत्रीय सांस्कृतिक संकेत सामने आते हैं। यह सिलसिला 2014 से लगातार लोगों की दिलचस्पी का विषय रहा है।
इस बार लाल बंधेज पगड़ी ने राजस्थानी और गुजराती सांस्कृतिक रंगों को सामने रखा। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बीच पारंपरिक परिधान का यह अंदाज प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस लुक को खास बनाता नजर आया।
आखिरकार, स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जब देश की विविधता एक मंच पर दिखाई देती है, तो पहनावे की छोटी-सी बारीकी भी अपने भीतर एक सांस्कृतिक कहानी समेट लेती है। पीएम मोदी की पगड़ी को लेकर हर साल बनने वाली चर्चा इसी दिलचस्प परंपरा का हिस्सा है।













