नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। संसद के मानसून सत्र में कई दिनों से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए बुधवार को सरकार की ओर से एक और पहल सामने आई। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के आरोपों पर सदन में विस्तृत चर्चा की पेशकश की। उन्होंने कहा कि वह पूरी चर्चा के दौरान सदन में मौजूद रहेंगे और विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देंगे।
अमित शाह ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस पहल पर तत्काल सहमति नहीं बनी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर की घटना को लेकर गृह मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहरा दी। इससे सत्र के अंतिम दिन भी सदन में गतिरोध खत्म होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
मानसून सत्र में गतिरोध तोड़ने के लिए सरकार की कोशिश
संसद का मौजूदा मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही नीट और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों तथा जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। 20 जुलाई को जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
सरकार की ओर से बातचीत और सदन चलाने की कोशिशें भी होती रही हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से विधेयक पर चर्चा में शामिल होने की अपील की थी, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया।
इसी क्रम में अमित शाह की ओर से चर्चा के लिए खुला प्रस्ताव रखना सरकार की तरफ से गतिरोध तोड़ने की एक और कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अमित शाह ने कहा- चर्चा से निकलेगा समाधान
अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि लोकतंत्र में संवाद और चर्चा के जरिए ही समाधान का रास्ता निकलता है। उन्होंने विपक्ष के साथ सहमति बनाकर जंतर-मंतर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करने का आग्रह किया।
शाह की पेशकश ऐसे समय आई है जब विपक्ष लगातार सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांग रहा है। उनका कहना था कि वह चर्चा के दौरान मौजूद रहेंगे, विपक्षी सदस्यों को सुनेंगे और उनके सवालों का जवाब देंगे।
इससे पहले 27 जुलाई को भी संसद में गतिरोध खत्म करने को लेकर अमित शाह, किरेन रिजिजू और पीयूष गोयल के बीच बैठक हुई थी। उस समय भी सरकार की प्राथमिकता सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाना और लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा कराना थी।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक बना टकराव का बड़ा मुद्दा
संसद में इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 भी रहा। सरकार ने इसे परीक्षा में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से पेश किया था।
विधेयक में सजा और जुर्माने को कठोर करने के साथ जांच तथा मुकदमे की प्रक्रिया को तेज करने के प्रावधान किए गए हैं। लोकसभा में इस पर करीब दस घंटे चर्चा हुई और विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ। इसके बाद 30 जुलाई को राज्यसभा ने भी इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया।
विपक्ष ने चर्चा के दौरान नीट परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। 29 जुलाई को राहुल गांधी ने लोकसभा में छात्रों के प्रदर्शन और जंतर-मंतर की घटना का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला था।
राहुल गांधी ने अमित शाह की जवाबदेही पर उठाए सवाल
राहुल गांधी की आपत्ति केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस कार्रवाई या गोली चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था तो उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वहीं, यदि ऐसा आदेश किसी अन्य अधिकारी की ओर से दिया गया था तो गृह मंत्री के रूप में शाह की भूमिका और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल उठता है। 29 जुलाई को राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को लेकर सार्वजनिक रूप से अमित शाह पर आरोप लगाए थे।
दूसरी ओर, सरकार और भाजपा ने छात्रों पर गोली चलाए जाने के आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में घटना की वास्तविक परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों पर सदन में चर्चा होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिरी दिन भी टकराव की आशंका
संसद में गतिरोध की स्थिति केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान नहीं है। इसके पीछे छात्रों के प्रदर्शन, नीट परीक्षा, पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई जैसे ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा संबंध युवाओं और अभ्यर्थियों से जुड़ा है।
अमित शाह की ओर से चर्चा के लिए समय देने और सदन में मौजूद रहकर जवाब देने की पेशकश ने गेंद अब विपक्ष के पाले में डाल दी है। लेकिन राहुल गांधी के इस्तीफे की मांग पर कायम रहने से सहमति की राह फिलहाल आसान नजर नहीं आती।
मानसून सत्र के अंतिम चरण में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर सदन में इस मुद्दे पर चर्चा का रास्ता निकाल पाएंगे। क्योंकि संसद में बहस रुकने से विवाद खत्म नहीं होता; कई बार उसका समाधान और भी दूर चला जाता है।












