नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। हाईवे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट (MCA) में गुणवत्ता, रखरखाव और निरीक्षण से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किया गया है। इसके तहत इंडिपेंडेंट इंजीनियर को निर्माणाधीन हाईवे के प्रत्येक किलोमीटर हिस्से का कम से कम महीने में एक बार निरीक्षण करना होगा।
अब तक कई परियोजनाओं में निगरानी के लिए रैंडम निरीक्षण पर जोर रहा है। नई व्यवस्था में हर किलोमीटर को नियमित जांच के दायरे में लाने की कोशिश की गई है। मकसद साफ है—निर्माण के दौरान छोटी दिखने वाली खामी आगे चलकर सड़क की बड़ी समस्या न बने।
हाईवे निर्माण की गुणवत्ता पर हर महीने होगी नजर
मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के मुताबिक निर्माण अवधि में ठेकेदार कंपनी को प्रत्येक महीने की समाप्ति के सात दिनों के भीतर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और इंडिपेंडेंट इंजीनियर को निर्माण कार्य की भौतिक और वित्तीय प्रगति की मासिक रिपोर्ट देनी होगी।
रिपोर्ट को प्राधिकरण द्वारा निर्धारित पोर्टल या वेबसाइट पर भी अपलोड करना होगा। इसके साथ ही इंडिपेंडेंट इंजीनियर को परियोजना हाईवे के प्रत्येक किलोमीटर का कम से कम महीने में एक बार निरीक्षण करना होगा।
यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि सड़क निर्माण में खराबी कई बार शुरुआत में दिखाई नहीं देती। सड़क की ऊपरी परत ठीक नजर आ सकती है, लेकिन उसके नीचे की सामग्री, बेस और अन्य निर्माण मानकों में कमी बाद में सामने आती है।
ड्रोन से होगी निगरानी, वीडियो रिकॉर्डिंग भी जरूरी
निरीक्षण के दौरान ड्रोन अथवा प्राधिकरण की अनुमति से किसी अन्य माध्यम से वीडियो रिकॉर्डिंग करनी होगी। इसके आधार पर इंडिपेंडेंट इंजीनियर को विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
रिपोर्ट में परियोजना के निर्धारित दायरे, तकनीकी मानकों और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर मिली कमियों और खामियों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
निरीक्षण के सात दिनों के भीतर रिपोर्ट की एक प्रति और संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग NHAI तथा ठेकेदार कंपनी को भेजनी होगी। यानी निरीक्षण केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, इसके लिए उसके साथ डिजिटल रिकॉर्ड भी जोड़ा जा रहा है।
खामी मिली तो ठेकेदार कंपनी को करना होगा सुधार
नए प्रावधानों में केवल कमी चिन्हित करने की बात नहीं है। जांच के दौरान यदि निर्माण कार्य में कोई खराबी या कमी सामने आती है तो ठेकेदार कंपनी को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
इसके बाद इंडिपेंडेंट इंजीनियर यह सुनिश्चित करने के लिए दोबारा जांच या आवश्यक परीक्षण कराने के निर्देश दे सकता है कि सुधार के बाद निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं। जब तक काम मानकों पर खरा नहीं उतरता, यह प्रक्रिया दोहराई जा सकती है।
यही वह हिस्सा है जहां नियमों की असली परीक्षा होगी। कागज पर मजबूत प्रावधान पहले भी रहे हैं; चुनौती उन्हें जमीन पर उतारने की है।
सिर्फ निरीक्षण नहीं, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी अहम
हाईवे निर्माण की गुणवत्ता का सवाल केवल सड़क की सतह देखकर तय नहीं किया जा सकता। निर्माण सामग्री, उसकी मात्रा, मिश्रण, परतों की मोटाई और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
ऐसे में ड्रोन से होने वाली वीडियो निगरानी सड़क की स्थिति और निर्माण गतिविधियों का रिकॉर्ड तो दे सकती है, लेकिन सामग्री की तकनीकी गुणवत्ता के लिए निर्धारित प्रयोगशाला परीक्षण और अन्य तकनीकी जांच भी जरूरी रहेंगी।
यही वजह है कि नई निगरानी व्यवस्था का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निरीक्षण रिपोर्ट के साथ सैंपल टेस्ट और सुधारात्मक कार्रवाई कितनी गंभीरता से लागू की जाती है।
जिम्मेदारी तय किए बिना नहीं बदलेगी तस्वीर
NHAI में लंबे समय तक परियोजना निदेशक के तौर पर काम कर चुके उत्तर प्रदेश के एक सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर के मुताबिक, सैंपल जांच, निरीक्षण और रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधान पहले भी मौजूद रहे हैं। असली सवाल उनके प्रभावी क्रियान्वयन का है।
उनका कहना है कि बड़ी परियोजनाओं में केवल ठेकेदार या कार्यदायी एजेंसी की जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा। निगरानी व्यवस्था में शामिल अधिकारियों और शीर्ष स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी सड़क की गुणवत्ता का असर केवल सरकारी परियोजना की लागत तक सीमित नहीं रहता। खराब निर्माण का सीधा संबंध यात्रियों की सुरक्षा, वाहन संचालन, मरम्मत खर्च और सड़क की उम्र से जुड़ा होता है।
नियम सख्त हुए, अब अमल की बारी
हाईवे निर्माण की गुणवत्ता सुधारने के लिए हर किलोमीटर की मासिक जांच का प्रावधान निगरानी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश है। वीडियो रिकॉर्डिंग, निरीक्षण रिपोर्ट और कमियों के सुधार की अनिवार्य प्रक्रिया से जवाबदेही बढ़ सकती है।
लेकिन सड़क निर्माण की दुनिया में असली कसौटी फाइल नहीं, सड़क होती है। नई व्यवस्था तभी सफल मानी जाएगी जब निरीक्षण रिपोर्टों में दर्ज कमियों पर समयबद्ध कार्रवाई हो, निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच निष्पक्ष तरीके से हो और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी भी तय की जाए।












