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उच्च शिक्षण संस्थानों में 90 दिन में भरें शिक्षकों के रिक्त पद, संसदीय समिति की अहम सिफारिश

On: July 17, 2026
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उच्च शिक्षण संस्थानों में 90 दिन में भरें शिक्षकों के रिक्त पद
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नई दिल्ली/17 जुलाई 2026: देश के विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से बने हुए शिक्षकों के रिक्त पद अब गंभीर नीति-चर्चा का विषय बन गए हैं। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने सुझाव दिया है कि किसी भी शिक्षक का पद खाली होने के बाद उसे अधिकतम 90 दिनों के भीतर भरना अनिवार्य किया जाए। समिति का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय पर नियुक्तियां सबसे बड़ी आवश्यकता हैं।

इसके साथ ही समिति ने यह भी सिफारिश की है कि जिन शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से पद खाली होने वाले हैं, उनकी भर्ती प्रक्रिया छह महीने पहले ही शुरू कर दी जाए, ताकि नियुक्ति में अनावश्यक देरी न हो।

अप्रैल 2025 तक करीब 28 प्रतिशत पद थे खाली

समिति के मसौदा सुझावों में उन आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है, जिनके अनुसार अप्रैल 2025 तक देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 28 प्रतिशत शिक्षक पद रिक्त थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में खाली पदों का सीधा असर पढ़ाई, शोध और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ता है।

इसी पृष्ठभूमि में समिति ने भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है, ताकि छात्रों को पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हो सकें और संस्थानों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो।

मानसून सत्र में पेश हो सकती है समिति की रिपोर्ट

संयुक्त संसदीय समिति ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर अपनी रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया है। माना जा रहा है कि इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

हालांकि मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए 17 जुलाई को प्रस्तावित समिति की बैठक स्थगित कर दी गई। सूत्रों के अनुसार अब यह बैठक 20 जुलाई को आयोजित होने की संभावना है, जिसके बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

23 बैठकों में जुटाई गई विशेषज्ञों और राज्यों की राय

समिति अब तक इस विधेयक पर करीब 23 बैठकें कर चुकी है। इस दौरान विभिन्न राज्यों, शिक्षाविदों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए गए। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करना है।

इसी दिशा में विधेयक में एक ऐसी गुणवत्ता मूल्यांकन परिषद के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन और निगरानी करेगी।

गुणवत्ता पर उठे सवाल, तब आया 90 दिन का सुझाव

विधेयक पर विचार-विमर्श के दौरान समिति के कई सदस्यों ने यह सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली रहेंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बेहतर होगी। इस चर्चा के बाद समिति ने सर्वसम्मति से यह सिफारिश स्वीकार की कि शिक्षकों के रिक्त पद अधिकतम 90 दिनों के भीतर भरे जाएं।

समिति का यह भी मानना है कि यदि सरकार इन सुझावों को लागू करती है, तो आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर की जा सकती है। इससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा और उच्च शिक्षा प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।

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