चित्रकूट/रविवार, 6 सितंबर 2026: चित्रकूट में अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित परिवारों तक राहत जल्द पहुंचाने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट समयसीमा दी है। चित्रकूट का दौरा कर लखनऊ लौटे मुख्यमंत्री ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि चित्रकूट बाढ़ राहत के तहत शेष राहत किट का वितरण अगले 48 घंटे के भीतर हर हाल में पूरा कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता के लिए इंतजार न करना पड़े। फसल और मकानों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ देने के साथ आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
चित्रकूट बाढ़ राहत में 48 घंटे की समयसीमा
राहत कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित लोगों के बीच बची हुई सभी राहत किट 48 घंटे में पहुंच जानी चाहिए। राहत सामग्री के वितरण में किसी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहने और जरूरत के मुताबिक लोगों को सहायता उपलब्ध कराने को कहा। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक उसका लाभ पहुंचे।
किसानों और मकान मालिकों के नुकसान का होगा सर्वे
मुख्यमंत्री ने बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसल क्षति का सर्वे शीघ्र पूरा कराने को कहा। सर्वे के आधार पर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
इसी तरह जिन मकानों को पूरी तरह नुकसान पहुंचा है, उनके परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए भी मरम्मत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि क्षति के आकलन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, ताकि वास्तविक नुकसान झेलने वाले परिवार सहायता से वंचित न रहें।
मंदाकिनी के कैचमेंट एरिया से हटेगा अतिक्रमण
बैठक में मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने अतिक्रमण का चिन्हांकन कर नियमानुसार उसे हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस विषय में शासन के अधिकारी जनपदीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद करें। नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जल निकासी को बनाए रखना जरूरी है। इसके साथ ही घाटों के विस्तारीकरण के लिए भी आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
मंदाकिनी को लेकर मुख्यमंत्री का जोर केवल बाढ़ प्रबंधन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने नदी की स्वच्छता और निर्मलता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
मंदाकिनी में नहीं जाएगा सीवर और नालों का पानी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पवित्र मंदाकिनी नदी में किसी भी स्थिति में सीवर अथवा नालों का पानी नहीं जाना चाहिए। इसके लिए पर्यटन, सिंचाई और नगर विकास विभाग को आपसी समन्वय से ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी चित्रकूट की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी नदी है। ऐसे में इसकी स्वच्छता बनाए रखना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
व्यापारियों और मठ-मंदिरों को भी मिलेगी सहायता
बाढ़ से चित्रकूट धाम के व्यापारियों को हुए नुकसान का भी आकलन कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रभावित व्यापारियों को सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
मठ-मंदिरों को हुई क्षति का सर्वे कराकर उनकी मरम्मत का काम भी जल्द शुरू कराने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण में शासन की ओर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चित्रकूट की अर्थव्यवस्था और स्थानीय जीवन का बड़ा हिस्सा धार्मिक पर्यटन से जुड़ा हुआ है। बाढ़ के कारण दुकानों, प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों को हुए नुकसान का असर केवल तत्काल आर्थिक गतिविधियों पर नहीं, बल्कि आने वाले दिनों के पर्यटन पर भी पड़ सकता है।
फुट ओवर ब्रिज का होगा सेफ्टी ऑडिट
मंदाकिनी नदी पर बने फुट ओवर ब्रिज की सुरक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को ब्रिज का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े निर्माण कार्यों की सुरक्षा में किसी तरह की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। ऑडिट में यदि कोई कमी सामने आती है तो उसके सुधार के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए।
विजयादशमी से पहले पूरा हो एयरपोर्ट मार्ग का काम
मुख्यमंत्री ने चित्रकूट धाम से एयरपोर्ट को जोड़ने वाले मार्ग के निर्माण की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि इस सड़क का काम विजयादशमी से पहले हर हाल में पूरा कराया जाए।
निर्माण में देरी के कारणों की समीक्षा कर संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। चित्रकूट में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिहाज से एयरपोर्ट संपर्क मार्ग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष निगरानी
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार उपलब्ध रहें और लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता मिले।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी रखेंगी। बीमारी के लक्षण मिलने पर तत्काल उपचार और जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गोशालाओं में चारे की व्यवस्था और लंपी से बचाव पर जोर
बाढ़ के दौरान पशुधन की सुरक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने निर्देश जारी किए। उन्होंने गोशालाओं की जांच कराने और वहां पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
लंपी डिजीज से बचाव के लिए भी आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत एवं पुनर्वास के साथ पशुधन की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
भविष्य की बाढ़ से निपटने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ चित्रकूट के लिए ऐसी दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे भविष्य में अतिवृष्टि और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
इस योजना में मंदाकिनी का प्राकृतिक प्रवाह, कैचमेंट एरिया, अतिक्रमण, जल निकासी, नदी की स्वच्छता और जनसुरक्षा से जुड़े निर्माण कार्यों को प्रमुखता देने को कहा गया है।
दरअसल, इस बार की बाढ़ ने चित्रकूट में आपदा प्रबंधन के साथ-साथ नदी और उसके प्राकृतिक क्षेत्र के संरक्षण की जरूरत को भी सामने ला दिया है। अब सरकार की चुनौती तत्काल राहत पहुंचाने के साथ उन कारणों पर काम करने की है, जो आने वाले वर्षों में ऐसी आपदा के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं।










