नई दिल्ली/7 सितंबर 2026। दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग ढहने की घटना के बाद उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, एनडीआरएफ के महानिदेशक, दिल्ली पुलिस आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में राजधानी में इमारतों की सुरक्षा, छात्र आवास और पेइंग गेस्ट (PG) व्यवस्था से जुड़े नियमों की समीक्षा की गई। सत्य निकेतन की घटना ने एक बार फिर दिल्ली में पुरानी और असुरक्षित इमारतों की निगरानी तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सत्य निकेतन हादसे के बाद असुरक्षित इमारतों पर सख्ती
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को असुरक्षित इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी इमारत को खतरनाक पाए जाने के बाद कार्रवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में संस्थागत जवाबदेही तय करने और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के तहत एक समर्पित आपातकालीन तंत्र तैयार करने का निर्देश भी दिया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का तेजी से निपटारा करने के साथ-साथ किसी आपदा की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।
सत्य निकेतन जैसी घटनाओं में राहत और बचाव कार्य के दौरान समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर पहले से स्पष्ट जिम्मेदारियां और त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था होने से नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
शहरी विकास मंत्री की अध्यक्षता में बनेगी समिति
उपराज्यपाल ने शहरी विकास मंत्री आशीष सूद को एक समिति गठित करने और उसका नेतृत्व करने को कहा है। यह समिति मौजूदा PG दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगी।
इसके साथ ही विश्वविद्यालयों, नगर निगम (MCD) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के माध्यम से छात्रों के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित आवास के विकल्प तलाशे जाएंगे। समिति यह भी जांच करेगी कि क्या डीडीए के खाली पड़े आवासीय स्टॉक का इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए किया जा सकता है।
इस पहल का उद्देश्य खास तौर पर उन छात्रों के लिए सुरक्षित आवास के विकल्प बढ़ाना है, जो पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं और कई बार अनियमित या असुरक्षित पीजी अथवा किराये के आवास में रहने को मजबूर होते हैं।
सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर बिल्डिंग ढहने की घटना में सात लोगों की मौत हो गई। दिल्ली पुलिस ने मृतकों की पहचान अभिषेक, युवराज सोनी, पवन, अर्पित जहाज, अक्षत सिंह यादव, सुरिंदर सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के रूप में की है।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक हादसे में घायल लोगों में असगर अली, नीरज बावा, आदित्य कुमार, नितिश छिब और मो. अयान शामिल हैं।
घटना के बाद राहत एवं बचाव एजेंसियों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया। हादसे ने राजधानी में निर्माणाधीन, जर्जर और असुरक्षित इमारतों की निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
छात्र आवास की सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
बैठक में केवल हादसे के बाद कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय छात्र आवास की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। PG और छात्र आवासों में रहने वाले युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमों की समीक्षा को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि राजधानी में बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी युवा किराये के कमरों, पीजी और अन्य साझा आवासों में रहते हैं। ऐसे में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा के साथ अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी और स्थानीय प्रशासन को सूचना देने जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाना जरूरी है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद हुई यह बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इसमें असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई, जवाबदेही, आपदा प्रबंधन और सुरक्षित छात्र आवास—इन सभी पहलुओं को एक साथ रखा गया है।













