लखनऊ|19 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक मजबूत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा संदेश दिया है। रविवार को लखनऊ के गोमती नगर स्थित उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) के नवनिर्मित मुख्यालय भवन का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि यूपी होमगार्ड भर्ती में आपदा मित्रों को वरीयता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय कर्तव्य होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समय रहते चेतावनी, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन के जरिए प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक और प्रशिक्षित करना आवश्यक है।
यूपी होमगार्ड भर्ती में आपदा मित्रों को वरीयता देने का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपदा प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले आपदा मित्रों के अनुभव और योगदान को देखते हुए उन्हें भविष्य की यूपी होमगार्ड भर्ती में वरीयता दी जाएगी। उनका मानना है कि आपदा के समय प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और ऐसे लोगों को सरकारी व्यवस्था से जोड़ने से राहत एवं बचाव कार्य और प्रभावी होंगे।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन प्रत्येक नागरिक की दिनचर्या का हिस्सा बनना चाहिए और इसके लिए व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
200 करोड़ रुपये की लागत से बना अत्याधुनिक मुख्यालय
मुख्यमंत्री ने गोमती नगर में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नए भवन का लोकार्पण किया। लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस भवन में एक साथ 200 लोगों के प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा आधुनिक तकनीक से लैस कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जिससे राज्यभर में आपदा प्रबंधन की निगरानी और समन्वय बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
आपदा आने से पहले तैयारी पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्सर लोग और प्रशासन आपदा आने के बाद सक्रिय होते हैं, जबकि वास्तविक आवश्यकता पहले से तैयारी और सतर्कता की होती है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, प्रशिक्षण और समय पर सूचना मिलने से जन-धन की हानि को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने मानव और वन्यजीव संघर्ष को भी आपदा की श्रेणी में शामिल किया है। पिछले दो वर्षों के दौरान बिजनौर क्षेत्र से लगभग 80 तेंदुओं का सुरक्षित विस्थापन किया गया है।
स्कूल-कॉलेजों में बढ़ेगी आपदा प्रबंधन की जागरूकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को आपदा के समय सही निर्णय लेने के लिए तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि आधुनिक तकनीक के माध्यम से आकाशीय बिजली गिरने से पहले लोगों तक सूचना पहुंचा दी जाए तो बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं।
आधुनिक तकनीक और AI आधारित व्यवस्था पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में फतेहपुर, प्रयागराज, कौशांबी, जौनपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर और अंबेडकर नगर समेत कई जिलों में प्राकृतिक आपदा के कारण 111 लोगों की मौत हुई थी। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उन्होंने UPSDMA अधिकारियों को प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने और प्रत्येक नागरिक तक आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण पहुंचाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य की व्यवस्था में रिमोट सेंसिंग, एआई आधारित मॉनिटरिंग, अर्ली वार्निंग सिस्टम और मोबाइल आधारित सूचना प्रसारण प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा, ताकि संभावित आपदाओं की जानकारी समय रहते लोगों तक पहुंच सके।
डॉप्लर रडार और स्टेट इमरजेंसी सेंटर होंगे मददगार
कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नए भवन के पंचम तल पर स्टेट इमरजेंसी सेंटर स्थापित किया जा रहा है। वहीं, UPSDMA के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) योगेंद्र डिमरी ने कहा कि प्रदेश में मौसम की अधिक सटीक जानकारी के लिए डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर राजस्व राज्य मंत्री सुरेन्द्र दिलेर, प्रमुख सचिव अपर्णा यू और राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले आठ कर्मचारियों को सम्मानित किया।








