लखनऊ/5 नवंबर 2026: उत्तर प्रदेश में अपराधियों को सजा दिलाने और निर्दोषों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए फॉरेंसिक जांच व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैज्ञानिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि साक्ष्य जुटाने से लेकर उन्हें न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तक किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कमजोर साक्ष्य और जांच में छोटी सी चूक भी अपराधियों को कानून के शिकंजे से बचने का मौका दे सकती है। अब ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित कार्यक्रम में 28 नवचयनित वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदारी और निष्पक्षता के साथ काम करने की नसीहत दी। सीएम योगी ने कहा कि जिस पारदर्शिता के साथ उन्हें सरकारी सेवा में अवसर मिला है, उसी ईमानदारी से उन्हें पीड़ितों को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभानी होगी।
फॉरेंसिक साक्ष्य की प्रमाणिकता से तय होगी न्याय की मजबूती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वैज्ञानिक अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र करने तक सीमित नहीं है। यह भी जरूरी है कि साक्ष्य प्रमाणिक हों, उनकी गुणवत्ता बनी रहे और उन्हें न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अपराधी को सजा दिलाना और निर्दोष को झूठे आरोपों से बचाना सुशासन का मूल उद्देश्य है। वैज्ञानिक जांच के जरिए न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाया जा सकता है। ऐसे में फॉरेंसिक अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी गंभीरता से करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में समयबद्धता और साक्ष्यों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। यदि साक्ष्य कमजोर पड़ते हैं, तो इसका सीधा लाभ आरोपी को मिल सकता है। इसलिए प्रत्येक वैज्ञानिक अधिकारी को अपने कार्य में निष्पक्षता, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता का परिचय देना होगा।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य होने के बावजूद बरी हुआ माफिया, सीएम ने दिया उदाहरण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक दुर्दांत माफिया का उदाहरण देते हुए जांच प्रक्रिया में हुई चूक की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में एसटीएफ ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, इसके बावजूद आरोपी अदालत से बरी हो गया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, साक्ष्य मौजूद होने के बाद भी उन्हें प्रभावी तरीके से स्थापित करने में कमी रह गई। यह व्यवस्था की कमी थी, जिसे दूर करना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को समझाया कि केवल साक्ष्य जुटा लेना पर्याप्त नहीं है। उनकी विश्वसनीयता, सुरक्षित संरक्षण और न्यायालय में प्रस्तुति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जांच की किसी भी कमजोर कड़ी का फायदा आरोपी को मिल सकता है।
नए आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच को मिली अहम भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जुलाई 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन अनिवार्य किया गया है।
इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता है। प्रदेश सरकार इसी दिशा में वैज्ञानिक जांच से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार कर रही है।
सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में 500 फॉरेंसिक एविडेंस कलेक्ट करने वाले पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता के मुकाबले 600 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई हैं।
नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना और आधुनिक जांच सुविधाओं के विस्तार से पुलिस की वैज्ञानिक जांच क्षमता को मजबूत किया जा रहा है।
महर्षि गौतम के न्याय दर्शन का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने भारतीय न्याय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि गौतम ने हजारों वर्ष पहले प्रमाण के चार आधार बताए थे—प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द।
उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक वैज्ञानिक जांच व्यवस्था में भी इन सिद्धांतों का महत्व बना हुआ है। न्यायालय में सत्य की विजय के लिए विश्वसनीय और प्रमाणिक साक्ष्य जरूरी हैं।
सीएम योगी ने वैज्ञानिक अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे तकनीकी ज्ञान और आधुनिक संसाधनों का उपयोग करते हुए न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दें।
28 वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
लखनऊ में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 नवचयनित वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे।
इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में फॉरेंसिक जांच व्यवस्था का विस्तार केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाने का प्रयास है। वैज्ञानिक साक्ष्यों की मजबूती से अपराधियों को सजा दिलाने और निर्दोषों को न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।








