लखनऊ|20 मई 2026: उत्तर प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को लेकर सरकार अब अधिक सख्त रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सड़क सुरक्षा की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि सड़कों पर स्टंटबाजी, ओवरस्पीडिंग, नशे में वाहन संचालन और अवैध परिवहन गतिविधियों के लिए अब किसी तरह की ढील नहीं होगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने हाल के दिनों में लखीमपुर खीरी, अमरोहा, आगरा और अलीगढ़ समेत कई जिलों में हुई सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा को केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का विषय माना जाए।
यूपी सड़क सुरक्षा अभियान के तहत ‘टॉप टू बॉटम’ तय होगी जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए शासन से लेकर जिला स्तर तक प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए। सड़क सुरक्षा को लेकर शासन स्तर पर नियमित पाक्षिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में बार-बार सड़क हादसे हो रहे हैं, वहां दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान कर समयबद्ध समाधान तैयार किया जाए। दुर्घटना संभावित स्थानों को चिन्हित कर सुधारात्मक कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाए।
स्टंटबाजी, ओवरस्पीड और नशे में ड्राइविंग पर होगी कठोर कार्रवाई
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सार्वजनिक सड़कों को जोखिम का क्षेत्र नहीं बनने दिया जाएगा। स्टंटबाजी, तेज रफ्तार और शराब या नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस को संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कहा कि जागरूकता तथा प्रवर्तन दोनों साथ चलने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- अवैध वाहनों का संचालन पूरी तरह रोका जाए
- सड़कों के किनारे बने अवैध स्टैंड तत्काल हटाए जाएं
- अनियमित पार्किंग पर नियंत्रण हो
- केवल निर्धारित स्थलों पर पार्किंग की अनुमति दी जाए
आरटीओ से लेकर परिवहन निगम तक बढ़ेगी जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शासन स्तर पर तैनात परिवहन विभाग और निगम के अधिकारी भी फील्ड में सक्रिय रूप से निरीक्षण करें।
जिलों में तैनात आरटीओ और एआरटीओ अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। परिवहन निगम को निर्देश दिया गया कि केवल फिटनेस मानकों को पूरा करने वाली बसों को ही संचालन की अनुमति दी जाए और सभी बसें अधिकृत पार्किंग स्थलों पर ही खड़ी हों।
साथ ही चालकों और परिचालकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने स्कूल प्रबंधन संस्थाओं को भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए और बिना फिटनेस प्रमाणन वाले किसी भी वाहन को सड़क पर नहीं चलने दिया जाए।
यदि किसी वाहन पर लगातार यातायात उल्लंघन के चालान हो रहे हैं तो उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।
हाईवे सुरक्षा, एंबुलेंस और जागरूकता अभियान पर जोर
बैठक में निर्णय लिया गया कि हाईवे, एक्सप्रेसवे और व्यस्त मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी। दुर्घटना की स्थिति में तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस नेटवर्क और नजदीकी अस्पतालों की तैयारियों को भी मजबूत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि:
- टोल प्लाजा और प्रमुख चौराहों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम सक्रिय रहे
- सीट बेल्ट और हेलमेट उपयोग को लेकर अभियान चलाए जाएं
- सड़क सुरक्षा संदेश लगातार प्रसारित किए जाएं
- वेंडिंग जोन विकसित कर सड़क किनारे अव्यवस्था कम की जाए
जीरो फैटिलिटी योजना के शुरुआती नतीजे आए सामने
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में 21 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
सड़क सुरक्षा कोष के तहत 25 चार पहिया इंटरसेप्टर, 62 दोपहिया इंटरसेप्टर और 82 स्पीड लेजर गन जिलों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों में जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना लागू की गई है। इसके तहत गठित 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों ने पिछले चार महीनों में 566 लोगों की जान बचाने में भूमिका निभाई है।
इसके अलावा लोकनिर्माण विभाग को ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर तय समयसीमा में सुधार कार्य, साइनेज और आवश्यक स्थानों पर टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।









