लखनऊ, 02 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में निवेश और विकास की रफ्तार को नई दिशा देने की कवायद अब वैश्विक साझेदारियों के जरिए और तेज होती दिख रही है। इसी क्रम में गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सिंगापुर के उच्चायुक्त Simon Wong ने शिष्टाचार मुलाकात की। यह मुलाकात औपचारिक जरूर थी, लेकिन इसके भीतर छिपे संकेत काफी दूरगामी नजर आते हैं।
बैठक के दौरान यूपी-सिंगापुर सहयोग को निवेश, कौशल विकास (Skill Development), बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और सांस्कृतिक संबंधों के स्तर पर और मजबूत करने को लेकर गंभीर और सकारात्मक चर्चा हुई।
यूपी-सिंगापुर सहयोग को नई रफ्तार देने पर जोर
इस मुलाकात में सबसे अहम बात यह रही कि दोनों पक्षों ने सिर्फ संभावनाओं की चर्चा नहीं की, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस संकेत भी दिए।
उच्चायुक्त साइमन वोंग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फरवरी में हुई सिंगापुर यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरे ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच उत्तर प्रदेश की एक नई पहचान बनाई है। उनके मुताबिक, अब यूपी को “संभावनाओं के उभरते केंद्र” के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया कि सिंगापुर की कई कंपनियां प्रदेश में अपने निवेश का विस्तार करने की तैयारी में हैं। यह बात अपने आप में बताती है कि यूपी अब सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों के रडार पर मजबूती से आ चुका है।
स्किल डेवलपमेंट और रोजगार सृजन पर खास फोकस
बैठक में स्किल डेवलपमेंट को सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया। सिंगापुर, जो अपने तकनीकी कौशल और ट्रेनिंग मॉडल के लिए जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसरों का द्वार खोल सकता है।
संकेत दिए गए कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में ठोस प्रोजेक्ट्स सामने आ सकते हैं। अगर यह साझेदारी जमीन पर उतरती है, तो यह प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए करियर की दिशा बदलने वाला कदम साबित हो सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के नए आयाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में राज्य की बदलती तस्वीर को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि कैसे बेहतर कानून-व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क ने यूपी को निवेश के लिए आकर्षक बनाया है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा के साथ-साथ झांसी और वाराणसी जैसे शहरों में निवेश की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। इसके अलावा डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक कॉरिडोर और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसी परियोजनाएं विदेशी निवेशकों के लिए बड़े अवसर के रूप में पेश की गईं।
पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों को भी मिलेगा बढ़ावा
सिर्फ उद्योग और निवेश ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सहयोग भी इस मुलाकात का अहम हिस्सा रहा। कुशीनगर और सारनाथ जैसे बौद्ध स्थलों का जिक्र करते हुए पर्यटन क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस दिशा में काम हुआ, तो उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सीधा लाभ मिलेगा।
सीएम योगी का विजन: “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में साफ किया कि उत्तर प्रदेश अब “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि सिंगापुर जैसी तकनीकी रूप से मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ साझेदारी राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यूपी सरकार निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल माहौल देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है—और यही वजह है कि वैश्विक कंपनियां यहां आने में रुचि दिखा रही हैं।
आगे क्या?
बैठक के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि जल्द ही सिंगापुर का एक बड़ा औद्योगिक प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश का दौरा करेगा। यह दौरा कई बड़े निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप देने में निर्णायक साबित हो सकता है।
अगर यह साझेदारी योजनाओं से निकलकर वास्तविक परियोजनाओं में बदलती है, तो यूपी-सिंगापुर सहयोग आने वाले वर्षों में भारत की सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में से एक बन सकता है।








