लखनऊ, 21 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 के यूपी विधानमंडल मानसून सत्र 2026 को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद के तीसरे सत्र को 3 अगस्त 2026 से बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट, अध्यादेशों के स्थान पर विधेयक और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्य सदन में पेश किए जाएंगे। इसके साथ ही संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएगी।
सरकार के अनुसार, आगामी सत्र वित्तीय और विधायी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अनुपूरक बजट समेत कई विधेयक होंगे पेश
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक अनुदानों की मांग सदन के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
इसके अलावा पिछले सत्र के समाप्त होने के बाद शासन द्वारा जारी किए गए विभिन्न अध्यादेशों को विधायी रूप देने के लिए उनके प्रतिस्थानी विधेयक भी विधानसभा और विधान परिषद में पेश किए जाएंगे। सरकार अन्य आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक कार्य भी इसी सत्र में संपन्न कराने की तैयारी में है।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत बुलाया गया सत्र
सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि राज्य विधानमंडल का दूसरा सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित हुआ था। उसी दिन विधानसभा और विधान परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी, जबकि 7 मई 2026 से सत्रावसान घोषित किया गया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमावली के अनुसार विधानमंडल के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। इसी संवैधानिक व्यवस्था का पालन करते हुए तीसरा सत्र 3 अगस्त से बुलाने का निर्णय लिया गया है।
सदन में रखी जाएगी संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट
आगामी सत्र का सबसे चर्चित एजेंडा संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखना होगा।
सरकार के अनुसार, आयोग ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 28 अगस्त को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी थी। अब कैबिनेट ने इस रिपोर्ट को विधानसभा और विधान परिषद के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।
रिपोर्ट में कई गंभीर दावों का उल्लेख
सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, न्यायिक जांच रिपोर्ट में संभल की जनसांख्यिकीय स्थिति, पिछले कई दशकों में हुई सांप्रदायिक घटनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि संभल में लंबे समय के दौरान हुई हिंसक घटनाओं, पलायन और अन्य कारणों से जनसंख्या संरचना में बदलाव आया। इसमें पिछले सात दशकों में हुए दंगों, कुछ धार्मिक स्थलों, अवैध हथियारों और मादक पदार्थों के नेटवर्क तथा सुरक्षा संबंधी अन्य मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट में किए गए निष्कर्ष न्यायिक जांच आयोग के अवलोकन हैं और इनसे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्वजनिक और कानूनी स्तर पर अलग-अलग मत हो सकते हैं।
राजनीतिक रूप से भी अहम रहेगा सत्र
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आगामी मानसून सत्र में सरकार जहां अपने विधायी और वित्तीय एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष भी प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में 3 अगस्त से शुरू होने वाला यह सत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









