नई दिल्ली/4 अक्टूबर 2026: उत्तर भारत का मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मानसून की वापसी के बाद अब पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 6 से 12 अक्टूबर के बीच दो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित कर सकते हैं। इनके असर से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। स्काईमेट ने भी 6 से 10 अक्टूबर के बीच उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश की संभावना जताई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की 4 अक्टूबर की चेतावनी में भी 7 से 9 अक्टूबर के बीच पंजाब तथा हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली क्षेत्र में गरज-चमक और आंधी जैसी गतिविधियों की संभावना दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक फिलहाल कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
उत्तर भारत का मौसम: 6 अक्टूबर से बढ़ेगा पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक सोमवार से मौसम में बदलाव के संकेत मिलने शुरू हो सकते हैं। इसके बाद 6 अक्टूबर के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। पहाड़ी इलाकों से शुरू होने वाली यह मौसमी हलचल धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी हिस्सों तक पहुंच सकती है।
स्काईमेट के अनुसार 6 और 7 अक्टूबर के आसपास आने वाला पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों के साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश करा सकता है। 10 अक्टूबर के बाद बारिश की गतिविधियां राजस्थान तक भी पहुंचने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, मैदानी इलाकों में बारिश बहुत तेज रहने के आसार नहीं हैं। कई स्थानों पर हल्की बारिश, बूंदाबांदी और गरज-चमक के दौर देखने को मिल सकते हैं।
दिल्ली-पंजाब में 7 से 9 अक्टूबर के बीच गतिविधि बढ़ने के आसार
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मौसम फिलहाल अपेक्षाकृत शांत है, लेकिन अगले कुछ दिनों में तस्वीर बदल सकती है। IMD के 4 अक्टूबर के पूर्वानुमान के अनुसार 7, 8 और 9 अक्टूबर को हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली क्षेत्र में गरज-चमक और तेज हवा जैसी मौसमी गतिविधियों की संभावना है। पंजाब में भी इन्हीं तारीखों के दौरान ऐसी गतिविधियों का पूर्वानुमान है।
इसका मतलब यह है कि राजधानी में मानसून की वापसी के बाद भी बारिश की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि इसे मानसूनी बारिश के अगले दौर के बजाय पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।
पहाड़ों में पहले दिखेगा असर
पश्चिमी विक्षोभ का शुरुआती प्रभाव पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में देखने को मिलेगा। IMD के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 6 से 8 अक्टूबर के दौरान गरज-चमक वाली गतिविधियों की संभावना है। उत्तराखंड में भी 5 से 7 अक्टूबर के बीच ऐसी गतिविधियों का पूर्वानुमान दर्ज किया गया है।
पहाड़ों में मौसम बदलने के बाद इसका प्रभाव मैदानी क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। अक्टूबर के इस दौर में बारिश के साथ तापमान में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है।
मानसून की विदाई के बाद क्यों बदल रहा है बारिश का सिस्टम?
मानसून की वापसी का अर्थ यह नहीं है कि उत्तर भारत में बारिश पूरी तरह समाप्त हो जाती है। मानसून की वापसी के बाद बारिश के पीछे सक्रिय मौसमी प्रणालियां बदलने लगती हैं।
जून से सितंबर के दौरान उत्तर भारत में बारिश मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून और उससे जुड़ी नमी पर निर्भर रहती है। इसके बाद जैसे-जैसे मानसूनी हवाएं पीछे हटती हैं, पश्चिमी विक्षोभ जैसी प्रणालियों की भूमिका बढ़ने लगती है।
स्काईमेट के अनुसार 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 19 सितंबर से शुरू हुई थी और अक्टूबर की शुरुआत तक राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से मानसून पीछे हट चुका था।
किसानों के लिए बारिश राहत भी, चुनौती भी
अक्टूबर की बारिश किसानों के लिए दोधारी स्थिति पैदा कर सकती है। एक ओर जिन खेतों में खरीफ फसल कटाई के लिए तैयार है या कटकर खेत में पड़ी है, वहां बारिश परेशानी बढ़ा सकती है। नमी बढ़ने से फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती भी सामने आ सकती है।
दूसरी तरफ पर्याप्त नमी रबी सीजन की तैयारियों में मददगार हो सकती है। गेहूं, सरसों और चने जैसी फसलों की शुरुआती बुवाई के लिए खेतों में उचित नमी उपयोगी रहती है।
यानी अक्टूबर की बारिश का असर एक जैसा नहीं होगा। जहां खरीफ की कटाई चल रही है, वहां किसान के लिए यह मौसम थोड़ा सतर्क रहने वाला है; वहीं रबी की तैयारी कर रहे किसानों के लिए यही नमी आगे चलकर फायदेमंद साबित हो सकती है।
अक्टूबर में मौसम दिखाएगा कई रंग
अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के मौसम में बदलाव साफ दिखाई दे सकता है। पहाड़ों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, पंजाब-हरियाणा और दिल्ली में गरज-चमक के साथ बारिश के दौर बन सकते हैं, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी गतिविधि पहुंचने की संभावना है।
इसके साथ ही मानसून की वापसी के बाद उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ने पर दिन के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट और रातों में हल्की ठंडक की शुरुआत का रास्ता भी साफ हो सकता है। फिलहाल मौसम पूरी तरह करवट लेने से पहले एक संक्रमणकाल से गुजर रहा है—एक तरफ मानसून पीछे हट रहा है और दूसरी तरफ उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देने की तैयारी में है।











