लखनऊ (Sun, 09 Nov 2025) — उत्तर प्रदेश सरकार एक बार फिर शिक्षकों की Online Attendance व्यवस्था लागू करने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद बनी 12-सदस्यीय समिति की रिपोर्ट इसी महीने के अंत तक आने की उम्मीद है। इसके बाद ही परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति डिजिटल मोड में दर्ज कराई जा सकेगी। हालांकि, इस कदम ने शिक्षकों में उत्सुकता के साथ-साथ कई आशंकाओं को भी जन्म दिया है।
पृष्ठभूमि: पहले बच्चों की Online Attendance, अब शिक्षकों की बारी
बेसिक शिक्षा विभाग पहले से ही प्रेरणा पोर्टल के माध्यम से बच्चों की विद्यालय में उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज कर रहा है। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश भी दिए गए हैं। अब लक्ष्य है शिक्षकों की उपस्थिति को भी इसी तरह पारदर्शी और जिम्मेदाराना तरीके से रिकॉर्ड करना।
उच्च स्तर पर इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। इसमें वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा विशेषज्ञों के अलावा संभल, बाराबंकी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर से शिक्षक नेताओं को भी शामिल किया गया है। समिति को 15 दिनों के भीतर सिफारिशें सौंपनी हैं — जिसमें तकनीकी ढांचे से लेकर व्यावहारिक चुनौतियों तक सभी पहलुओं पर विचार होगा।
शिक्षक संघ ने रखीं ये प्रमुख मांगें
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ और अन्य शिक्षक संगठनों ने सरकार की पहल का स्वागत करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव भी रखे हैं:
- ऑनलाइन व्यवस्था से पहले प्रशिक्षण आवश्यक: कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। ऐसे क्षेत्रों में शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रणाली को लागू करने से पहले समुचित प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता सुनिश्चित की जाए।
- महिला शिक्षकों का विशेष ध्यान: दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात महिला शिक्षकों को परिवहन समस्याओं, जाम या आकस्मिक स्वास्थ्य कारणों से कुछ मिनट देरी हो सकती है—ऐसे में 20-30 मिनट की देरी पर अनुपस्थिति न दर्ज हो।
- अवकाश और अन्य सुविधाएं: संघ ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षकों पर स्वचालित ऑनलाइन निगरानी लागू हो रही है, तो राज्य कर्मचारियों की तरह उन्हें भी 30 अर्जित अवकाश (EL), 14 आकस्मिक अवकाश (CL) और 14 हाफ-डे लीव मिलने चाहिए।
- अन्य लंबित मुद्दों का समाधान: समय पर वेतनमान, एरियर, स्थानांतरण, और अन्य देयकों के भुगतान में लंबे समय से की जा रही देरी पर भी संगठन ने सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।
आगे की राह
शिक्षक संगठनों की ओर से कहा गया है कि यदि शासन इन व्यावहारिक मांगों को समाहित करते हुए ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करता है, तो इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षकों का कार्य उत्साह और भरोसा भी बढ़ेगा।
समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यूपी के स्कूली शिक्षा सिस्टम में Online Attendance से जुड़ा नया अध्याय किस रूप में शुरू होगा।







