वाराणसी/14 सितंबर 2026: वाराणसी में जलभराव की समस्या को लेकर योगी सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। जनसुविधाओं से जुड़े काम में लापरवाही बरतने के आरोप में उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के निर्माण खंड (वि./यां.) में तैनात अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। शासन ने उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक जांच के आदेश भी दिए हैं।
सरकार की इस कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि वाराणसी में जलभराव जैसी गंभीर जनसमस्या के मामले में जिम्मेदारी तय करने में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आई कमियों को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।
वाराणसी में जलभराव के बीच पम्प बंद रखने पर सवाल
नगर विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जांच में पाया गया कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर नदी के बैकफ्लो को रोकने के लिए जरूरी गेट या बैरियर लगाने को लेकर अपेक्षित आकलन और कार्ययोजना तैयार नहीं की गई थी।
इसके अलावा उच्चाधिकारियों की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुपालन में भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि 3 और 4 सितंबर को चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन तथा गोईठहां एसटीपी पर लगे पम्प बंद रहे।
भारी बारिश के दौरान पम्पों का समय पर संचालन नहीं होने का असर सीवर व्यवस्था पर पड़ा। सीवर लाइनों पर अत्यधिक दबाव बना और शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। इससे आम लोगों को परेशानी हुई और विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए।
नगर विकास मंत्री ने किया था प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण
वाराणसी में जलभराव की स्थिति का जायजा लेने के लिए नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने 12 और 13 सितंबर को प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी की व्यवस्था युद्धस्तर पर दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे।
मंत्री ने स्पष्ट कहा था कि जलभराव के कारण आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। स्थिति को लेकर उन्होंने नाराजगी भी जताई और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
इसके बाद शासन स्तर पर हुई कार्रवाई में अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया।
जांच में तय होगी जिम्मेदारी, कानपुर कार्यालय से संबद्ध किए गए
शासन ने इस मामले की अनुशासनिक जांच के लिए मुख्य अभियंता (क्रय), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), लखनऊ को पदेन जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-7 के तहत होगी।
निलंबन अवधि के दौरान पवन कुमार गुप्ता को मुख्य अभियंता (कानपुर क्षेत्र), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), कानपुर के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
सरकार की कार्रवाई का व्यापक संदेश यही है कि शहरों में जल निकासी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। वाराणसी में हालिया कार्रवाई इसी सख्त प्रशासनिक रुख की कड़ी मानी जा रही है।









