नई दिल्ली/02 जुलाई 2026: भारत और जापान ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची ने रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति जताई।
दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और जापान का सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान विश्व की प्रमुख लोकतांत्रिक एवं आर्थिक शक्तियों में शामिल हैं। ऐसे में दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, समृद्ध और कानून-आधारित बनाए रखने के लिए मिलकर काम करें।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने कई नई पहलों पर सहमति बनाई है, जिनके माध्यम से क्षेत्र में शांति, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक प्रगति को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी और अधिक व्यापक होगी।
AI और प्रौद्योगिकी सहयोग को मिलेगा नया विस्तार
बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को भविष्य के सहयोग का प्रमुख आधार माना गया। दोनों देशों ने AI क्षेत्र में संयुक्त वक्तव्य जारी किया, जिसके तहत भारतीय और जापानी संस्थानों के बीच कई समझौते हुए हैं।
सरकार के अनुसार, जापान की अत्याधुनिक प्रिसिजन टेक्नोलॉजी और भारत की मजबूत सॉफ्टवेयर क्षमता का संयोजन वैश्विक AI नवाचार को नई गति देगा। साथ ही अनुसंधान, स्टार्टअप और उभरती प्रौद्योगिकियों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
रक्षा क्षेत्र में पहली साझा विकास परियोजना पर बनी सहमति
रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए भारत और जापान ने पहली संयुक्त रक्षा विकास परियोजना पर समझौता किया। इस परियोजना के तहत नौसेना के लिए रेडियो एंटीना प्रणाली के संयुक्त विकास पर काम होगा।
सरकार का मानना है कि यह पहल रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करेगी और समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता तथा नियम-आधारित व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी।
निवेश, आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर विशेष जोर
बैठक में आर्थिक सुरक्षा को भी प्रमुख एजेंडा बनाया गया। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, एडवांस्ड मटेरियल्स और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए संयुक्त रोडमैप तैयार करने पर सहमति व्यक्त की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान भारत और जापान के बीच 100 से अधिक नए व्यावसायिक समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक जापानी निवेश आने की संभावना है। दोनों देशों का लक्ष्य अगले दस वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन का निवेश आकर्षित करना और जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना करना है।
ऊर्जा, स्वास्थ्य और हरित विकास में भी बढ़ेगा सहयोग
ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव की घोषणा की। इसके तहत भारत में 1,000 बायोगैस एवं ऑर्गेनिक खाद संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी तकनीक, परमाणु ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और बायोटेक सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य के लिए यह साझेदारी महत्वपूर्ण साबित होगी।
लोगों के बीच संपर्क और कौशल विकास पर रहेगा फोकस
भारत और जापान ने केवल आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन विकास पर भी विशेष जोर दिया। दोनों देशों ने स्किल डेवलपमेंट, तकनीकी इंटर्नशिप, उच्च शिक्षा, शोध, स्टार्टअप सहयोग और टैलेंट मोबिलिटी को बढ़ावा देने का निर्णय लिया।
साथ ही नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विकसित सहयोग मॉडल को शिपबिल्डिंग, एविएशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है।
जापानी प्रधानमंत्री ने रक्षा और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की जताई प्रतिबद्धता
शिखर सम्मेलन के बाद जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची ने कहा कि जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स का एक डिस्ट्रॉयर और भारतीय नौसेना के जहाज संयुक्त अभ्यास करेंगे। हिंद महासागर में रक्षा सहयोग को और मजबूत किया जाएगा तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संकट से जुड़े जोखिमों पर भी व्यापक चर्चा की है। भारत के पेट्रोलियम भंडारण तंत्र को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय संवाद शुरू करने पर भी सहमति बनी है।
भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हुए ये फैसले संकेत देते हैं कि दोनों देश बदलते वैश्विक परिदृश्य में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिर, सुरक्षित और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक सहयोग का रोडमैप तैयार कर चुके हैं।













