बांदा/02 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून को लेकर किसानों की चिंता बढ़ सकती है। Super El Nino के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से समय रहते खेती की रणनीति बदलने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो धान जैसी अधिक पानी वाली फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। ऐसे में किसान दलहन, तिलहन और श्रीअन्न (मिलेट्स) जैसी कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें, ताकि उत्पादन और आय दोनों सुरक्षित रह सकें।
कृषि मंत्री बांदा स्थित रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित ‘कृषि पर एल नीनो के प्रभाव से बचाव एवं खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत कृषक गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
Super El Nino यूपी कम बारिश: क्यों बढ़ी किसानों की चिंता?
मंत्री ने बताया कि एल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में होने वाला असामान्य बदलाव है, जिसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। इस बार Super El Nino की आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण भारत में सामान्य से कम वर्षा, अनियमित मानसून और बारिश के बीच लंबे अंतराल की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खरीफ सीजन में धान का रकबा सीमित रखें और उसकी जगह अरहर, उड़द, मूंग, तिल, मूंगफली, रागी, ज्वार, बाजरा समेत अन्य श्रीअन्न की खेती पर जोर दें। इन फसलों में पानी की आवश्यकता कम होती है और बाजार में इनका मूल्य भी बेहतर मिलता है।
बुंदेलखंड में बारिश के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि पिछले वर्ष जून महीने में बांदा, चित्रकूट, झांसी और ललितपुर सहित बुंदेलखंड के कई जिलों में करीब 200 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। जबकि इस वर्ष अब तक इन इलाकों में 35 मिलीमीटर से भी कम बारिश हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि अगले 20 से 30 दिनों तक पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान हो सकता है। इसलिए किसानों को अभी से कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करना चाहिए।
दलहन और श्रीअन्न से बढ़ेगी किसानों की आय
कृषि मंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड पहले से ही दलहन और तिलहन उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र रहा है। सरकार भी इन फसलों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि अरहर, मूंग, उड़द, तिल और रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) धान की तुलना में अधिक है। इससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि बदलते मौसम को देखते हुए खेती के पारंपरिक तरीकों में भी बदलाव लाना समय की जरूरत है।
ढैंचा की खेती अपनाने की सलाह, सरकार खरीदेगी बीज
मंत्री ने किसानों को ढैंचा की खेती अपनाने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि इसे हरी खाद के रूप में खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार किसानों से ढैंचा का बीज खरीदेगी।
एफपीओ को ट्रैक्टर, किसानों को मिनीकिट और बीमा लाभ
कार्यक्रम के दौरान किसानों को तिलहन और श्रीअन्न के मिनीकिट वितरित किए गए। सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना के तहत चयनित किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को 80 प्रतिशत अनुदान पर ट्रैक्टर की प्रतीकात्मक चाबी सौंपी गई। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक भी वितरित किए गए।
26.68 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, 136 करोड़ के कार्यों की समीक्षा
इससे पहले कृषि मंत्री ने बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 26.68 करोड़ रुपये की लागत से बने टाइप-3 और टाइप-4 आवासों का लोकार्पण किया। साथ ही 136 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम के अंत में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इस अवसर पर राज्यमंत्री रामकेश निषाद, मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पांडेय, कुलपति डॉ. एस.वी.एस. राजू सहित कृषि विभाग और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे।











