नई दिल्ली/18 अगस्त 2026। डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के बीच UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर चल रही चर्चा के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में किए गए संशोधन को मंजूरी दे दी है। संसद ने इस विधेयक को 10 अगस्त 2026 को पारित किया था।
हालांकि, इसे समझना जरूरी है कि राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आम लोगों से UPI भुगतान पर तत्काल शुल्क वसूला जाना शुरू हो गया है। संशोधन सरकार को भविष्य में कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी रास्ता उपलब्ध कराता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में स्पष्ट कर चुकी हैं कि आम यूजर्स के लिए UPI भुगतान नि:शुल्क रहेगा।
UPI पेमेंट पर चार्ज का क्या है पूरा मामला?
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बाद सरकार अधिसूचना के जरिए यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यानी अब कानून में ऐसा प्रावधान रहेगा जिससे भविष्य में निर्धारित श्रेणी के डिजिटल भुगतान पर MDR की व्यवस्था की जा सके।
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए कारोबारी पक्ष से लिया जाता है। यह सीधे-सीधे UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहक पर लगने वाला शुल्क नहीं होता।
यही अंतर इस पूरे बदलाव को समझने के लिए सबसे अहम है। अभी UPI पर जीरो-MDR व्यवस्था लागू है, लेकिन नया संशोधन भविष्य में चुनिंदा लेनदेन के लिए शुल्क व्यवस्था का रास्ता खोलता है।
आम UPI यूजर को अभी नहीं देना होगा कोई चार्ज
सरकार ने इस मामले में आम उपभोक्ताओं की आशंका को दूर करने की कोशिश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा था कि UPI भुगतान आम लोगों के लिए मुफ्त रहेगा और भविष्य में यदि MDR लगाया जाता है तो यह केवल कुछ निश्चित श्रेणी के कारोबारी लेनदेन तक सीमित रहेगा।
इसका मतलब यह है कि रोजमर्रा में चाय की दुकान, सब्जी वाले, छोटे दुकानदार या सामान्य छोटे भुगतान करने वाले ग्राहकों पर तत्काल कोई नया UPI चार्ज लागू नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा था कि कम मूल्य के भुगतान और छोटे कारोबारियों से जुड़े अधिकांश लेनदेन शुल्क-मुक्त रहने की उम्मीद है।
बड़े कारोबारियों पर हो सकता है असर
संशोधन की चर्चा में मुख्य ध्यान बड़े मूल्य वाले कारोबारी लेनदेन पर है। मौजूदा कानूनी ढांचे में कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से होने वाले भुगतान पर बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाता शुल्क नहीं लगा सकते थे। संशोधन इस व्यवस्था को बदलने की गुंजाइश देता है।
रिपोर्टों के अनुसार, बड़े व्यापारियों से जुड़े चुनिंदा UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर भविष्य में MDR लागू किए जाने की संभावना है। हालांकि, कितना शुल्क लगेगा, किन कारोबारियों पर लगेगा और किस लेनदेन को इसके दायरे में रखा जाएगा—इनका अंतिम फैसला अलग अधिसूचना और संबंधित व्यवस्था के जरिए होगा।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हर UPI भुगतान पर कोई निश्चित प्रतिशत शुल्क लगने वाला है।
UPI के साथ RuPay को भी संशोधन में जगह
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में बदलाव का दायरा केवल UPI तक सीमित नहीं है। इसमें RuPay डेबिट कार्ड जैसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम भी चर्चा के केंद्र में हैं।
पहले से लागू व्यवस्था में BHIM-UPI, UPI QR और RuPay डेबिट कार्ड जैसे निर्धारित माध्यमों पर कुछ परिस्थितियों में शुल्क लगाने पर रोक थी। संशोधित व्यवस्था सरकार को यह तय करने की अधिक गुंजाइश देती है कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को शुल्क से छूट दी जाए।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम के लिए क्यों अहम है बदलाव?
भारत में UPI का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ा है, उसके साथ भुगतान कंपनियों, बैंकों और तकनीकी ढांचे पर लागत का दबाव भी बढ़ा है। भुगतान नेटवर्क को चलाने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, सर्वर और लेनदेन प्रसंस्करण जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार निवेश करना पड़ता है।
इसी पृष्ठभूमि में MDR को लेकर बहस लंबे समय से चल रही है। सरकार की ओर से फिलहाल आम उपभोक्ता को राहत का भरोसा दिया गया है, जबकि संशोधन भविष्य में चुनिंदा कारोबारी लेनदेन के लिए शुल्क व्यवस्था की संभावना खोलता है।
कराधान कानून में भी किए गए हैं अहम बदलाव
राष्ट्रपति की मंजूरी पाने वाला कानून केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं है। कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 में निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डेटा सेंटर से जुड़े कई प्रावधान भी शामिल हैं।
कानून के तहत विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के अनुबंध विनिर्माण से जुड़ी कर छूट को वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट और सर्वर के साथ उनके प्रमुख कलपुर्जे एवं सहायक उपकरण शामिल हैं।
इसके अलावा विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में डेटा सेंटर सेवाओं के इस्तेमाल से संबंधित कर प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं। जून 2026 में जारी अध्यादेश के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले कुछ विदेशी निवेशकों की ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को कर छूट देने की व्यवस्था भी लाई गई थी, जिसे अब कानून में शामिल किया गया है।
अभी UPI चार्ज को लेकर क्या समझें?
सीधी बात यह है कि राष्ट्रपति की मंजूरी से UPI पर तत्काल कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। संशोधन ने सरकार को भविष्य में निर्धारित डिजिटल भुगतान लेनदेन पर MDR लगाने के लिए कानूनी आधार दिया है।
आम UPI ग्राहक के लिए फिलहाल भुगतान व्यवस्था पहले की तरह मुफ्त है। असली बदलाव तब दिखाई देगा, जब सरकार किसी विशेष भुगतान माध्यम, व्यापारी श्रेणी या लेनदेन के लिए शुल्क से जुड़ी अधिसूचना जारी करेगी।
इसलिए फिलहाल UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। हां, आने वाले समय में बड़े कारोबारियों और कुछ खास श्रेणी के डिजिटल लेनदेन की लागत व्यवस्था में बदलाव जरूर देखने को मिल सकता है।













