नेल्लोर/लखनऊ,7 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की नई पीढ़ी आधुनिक और वैश्विक दृष्टिकोण वाली हो, लेकिन अपनी संस्कृति, परंपरा और जड़ों से उसका जुड़ाव भी मजबूत रहना चाहिए। उसके भीतर देश के प्रति गौरव और समाज के प्रति संवेदनशीलता हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लक्ष्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो ‘ग्लोबल भी हो और रूटेड भी’, तकनीक के साथ आगे बढ़े, लेकिन उसके हृदय में भारत और मन में ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना हो।
मुख्यमंत्री सोमवार को स्वर्ण भारत ट्रस्ट के 25वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में उनके पहुंचते ही ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से परिसर गूंज उठा। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ट्रस्ट के संस्थापक एवं पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक काल ने भारत की स्वावलंबी ग्रामीण व्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया। गांवों की आत्मनिर्भरता कमजोर हुई और स्थानीय संस्थाओं पर भी इसका असर पड़ा। हालांकि, उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदलीं, लेकिन गांवों की आत्मा कभी समाप्त नहीं हुई।
नई पीढ़ी ग्लोबल हो, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ी रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्ण भारत ट्रस्ट का रेजिडेंशियल ब्रिज स्कूल और उत्तर प्रदेश के अटल आवासीय विद्यालय भले ही अलग-अलग राज्यों में संचालित हो रहे हों, लेकिन दोनों की सोच एक है। दोनों संस्थान वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत ऐसी शिक्षा व्यवस्था की है, जो बच्चों को केवल रोजगार के लिए तैयार न करे, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक भी बनाए। आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कारों का संतुलन नई पीढ़ी की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
सीएम योगी ने पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेतु बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व बहुआयामी और अत्यंत संवेदनशील है। सार्वजनिक जीवन में सरलता, सहजता और सभी को साथ लेकर चलने की उनकी क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा व्यक्तित्व दुर्लभ होता है, जो दल और विचारधारा की सीमाओं से ऊपर उठकर समाज के अलग-अलग वर्गों में समान रूप से स्वीकार्य हो। राज्यसभा के सभापति के रूप में भी उनकी व्यापक स्वीकार्यता दिखाई देती थी। उन्होंने तेलुगु संस्कृति, खान-पान और वेशभूषा को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2001 में शुरू हुई दो यात्राओं का लक्ष्य विकसित भारत
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2001 में एक व्यक्ति ने शासन में रहते हुए समाज सेवा की यात्रा शुरू की थी और आज वही व्यक्ति भारत के प्रधानमंत्री हैं। इसी वर्ष समाज सेवा की एक दूसरी यात्रा भी शुरू हुई, जो आज स्वर्ण भारत ट्रस्ट के रूप में सामने है।
उन्होंने कहा कि 25 वर्ष बाद दोनों यात्राओं का लक्ष्य एक ही है—विकसित भारत। जब सरकार और समाज की दिशा एक हो, संकल्प एक हो और लक्ष्य हासिल करने के लिए दोनों मिलकर प्रयास करें तो परिणाम आना स्वाभाविक है।
सीएम ने स्वर्ण भारत ट्रस्ट के 25 वर्ष पूरे होने पर उसके पदाधिकारियों, सदस्यों और शुभचिंतकों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने स्वास्थ्य केंद्र, दंत एवं नेत्र चिकित्सा, पशु चिकित्सा, किसान प्रशिक्षण, महिला प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा, कंप्यूटर प्रशिक्षण, विद्यालयों और ब्रिज स्कूलों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लिए काम किया है।
भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं गांव
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति उसके गांव रहे हैं। सदियों तक गांव केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक जीवन और संस्कृति के केंद्र रहे। कृषि, पशुपालन, शिल्प, व्यापार और स्थानीय संस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी थीं।
उन्होंने इसे एक तरह की सर्कुलर इकोनॉमी बताते हुए कहा कि गांव में एक व्यक्ति का उत्पादन दूसरे की आजीविका का आधार बनता था। गांव उत्पादन के साथ ज्ञान, जल संरक्षण, कला और शिल्प के भी केंद्र थे।
औपनिवेशिक दौर के प्रभाव का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि इसका असर केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण आत्मनिर्भरता घटी और स्थानीय संस्थाएं कमजोर हुईं।
उन्होंने महात्मा गांधी के ‘बैक टू विलेज’ और ‘ग्राम स्वराज’ के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी ऐसा गांव चाहते थे, जो अपनी आवश्यकताओं के लिए सक्षम और अपने निर्णय खुद लेने में समर्थ हो।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए एम. वेंकैया नायडू ने वर्ष 2001 में अपने आठ साथियों के साथ स्वर्ण भारत ट्रस्ट की स्थापना की थी।
वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाना जरूरी
सीएम योगी ने रेजिडेंशियल ब्रिज स्कूल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग के बच्चों को केवल स्कूल भेजना पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा के साथ भोजन, किताबें, ड्रेस और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए, ताकि वे लगातार पढ़ाई कर सकें।
अक्षरा विद्यालय और स्वर्ण भारती विद्या मंदिर जैसे संस्थानों के जरिए ग्रामीण और बीपीएल परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में श्रमिकों के बच्चों के लिए 18 मंडल मुख्यालयों पर अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं। कोरोना महामारी के दौरान माता-पिता को खोने वाले बच्चों को भी इन विद्यालयों में शिक्षा और आवास की सुविधा दी जा रही है। ये निःशुल्क आवासीय विद्यालय हैं और इनमें आधी सीटें बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं।
पुराने हुनर को नया बाजार देने से बदली तस्वीर
उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हुनर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लगभग हर जिले की अपनी विशिष्ट कला या उत्पाद है। वाराणसी की साड़ी, भदोही का कालीन, मुरादाबाद का पीतल, फिरोजाबाद का कांच, कन्नौज का इत्र और लखनऊ की चिकनकारी इसके उदाहरण हैं।
पीढ़ियों से इन कामों को आगे बढ़ाने वाले कारीगरों के सामने आधुनिक डिजाइन, पूंजी और बाजार की कमी बड़ी चुनौती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत जिले के प्रमुख उत्पादों को चिन्हित कर कारीगरों को डिजाइन प्रशिक्षण, आधुनिक टूल किट, आसान बैंक ऋण और मार्केटिंग व निर्यात के अवसर उपलब्ध कराए गए।
‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण और टूल किट दिए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि स्थानीय हुनर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा, “हमने कारीगर को नया हुनर नहीं सिखाया, बल्कि उसके पुराने हुनर को नया बाजार उपलब्ध कराया है।”
गांव की बेटियों को गांव में ही मिला रोजगार
ग्रामीण महिलाओं के प्रशिक्षण के लिए स्वर्ण भारत ट्रस्ट की व्यवस्था की सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। व्यवस्था सुरक्षित होने पर ही परिवार अपनी बेटियों को प्रशिक्षण और रोजगार के लिए बाहर भेजने का भरोसा करता है।
उत्तर प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ के तहत महिलाओं को बीसी सखी के रूप में तैयार करने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और डिजिटल डिवाइस उपलब्ध कराकर उन्हें बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया। अब गांव के बुजुर्गों और अन्य लोगों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। गांव की बेटियां ही उनके घर तक यह सेवा पहुंचा रही हैं और इसके बदले उन्हें आय भी प्राप्त हो रही है।
गोवंश संरक्षण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल बनाए गए हैं। निराश्रित गोवंश पालने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से प्रति गोवंश 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण को बताया जनभागीदारी की मिसाल
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के खिलाफ चलाए गए अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी इंसेफेलाइटिस के कारण हर साल बड़ी संख्या में मौतें होती थीं।
गोरखपुर से सांसद रहते हुए इस मुद्दे को उठाने और आंदोलन करने का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि लंबे समय तक समाधान आसान नहीं था। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुआ। उस समय वेंकैया नायडू भी केंद्रीय मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण सदस्य थे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हर घर शौचालय’ के लक्ष्य और उत्तर प्रदेश में चलाए गए ‘दस्तक अभियान’ के जरिए स्वच्छता एवं जागरूकता पर जोर दिया गया। उनके अनुसार, इन प्रयासों से इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण और उसके उन्मूलन की दिशा में सफलता मिली।
तकनीक भेदभाव नहीं करती, गांवों तक पहुंचा उसका लाभ
सीएम योगी ने कहा कि आज तकनीक का दौर है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भेदभाव नहीं करती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तकनीक का इस्तेमाल महिला और ग्रामीण सशक्तीकरण को गति देने के लिए किया जा रहा है।
जनधन खातों और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि करीब 60 करोड़ लोग जनधन खातों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और भारत डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में दुनिया के लिए उदाहरण बन रहा है। इसका लाभ दुकानदारों, महिलाओं और किसानों समेत समाज के अलग-अलग वर्गों को मिल रहा है।
समारोह में आंध्र प्रदेश सरकार के नगर प्रशासन एवं शहरी विकास मंत्री पी. नारायणा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव, भाजपा आंध्र प्रदेश अध्यक्ष पी.बी.एन. माधव, राज्यसभा सांसद बीडा मस्तान राव, स्वर्ण भारत ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. कामिनेनी श्रीनिवास, विधायक सोमीरेड्डी चंद्रमोहन रेड्डी, ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी दीपा वेंकट, पुष्पा बरपु फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी एम. हर्षवर्धन समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।









