शिलांग/7 सितंबर 2026। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सोमवार को अपने चार पूर्वोत्तर राज्यों के दौरे के तहत मेघालय पहुंचे। उमरोई हवाईअड्डे पर मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसॉन्ग, राज्य सरकार के मंत्री सनबोर शुल्लाई समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मेघालय पहुंचते ही उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के स्वागत में स्थानीय संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाई दी। पारंपरिक तौर-तरीकों से हुए इस स्वागत ने पूर्वोत्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा। असम के बाद मेघालय पहुंचे उपराष्ट्रपति के इस दौरे को केंद्र और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिलांग में होगा उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का नागरिक अभिनंदन
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन सोमवार शाम शिलांग स्थित सोसो थाम सभागार में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें मेघालय के विभिन्न समुदायों के कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सामने रखेंगे।
उपराष्ट्रपति के दौरे के दौरान मेघालय में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं का फोकस आधारभूत ढांचे के विकास और आम लोगों से जुड़ी जनसुविधाओं को मजबूत करने पर है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए राज्य में विकास की प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय जरूरतों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
मेघालय के बाद मणिपुर जाएंगे उपराष्ट्रपति
मेघालय का कार्यक्रम पूरा करने के बाद उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन मंगलवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल जाएंगे। यहां उनके मोइरांग स्थित आजाद हिंद फौज संग्रहालय और युद्ध स्मारक का दौरा करने का कार्यक्रम है। वे सैनिक स्कूल इंफाल भी जाएंगे।
मणिपुर के कार्यक्रमों के बाद उपराष्ट्रपति अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के लिए रवाना होंगे। चार राज्यों का यह दौरा पूर्वोत्तर के अलग-अलग राज्यों की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा।
9 सितंबर को अरुणाचल विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होंगे
दौरे के अंतिम चरण में 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ईटानगर में अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होंगे। इसके अलावा उनके राज्य के संग्रहालयों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा करने का भी कार्यक्रम है।
पूर्वोत्तर भारत अपनी भौगोलिक विविधता के साथ-साथ अलग-अलग जनजातीय समुदायों, भाषाओं और परंपराओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में उपराष्ट्रपति का विभिन्न राज्यों का दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय संस्थाओं के साथ संवाद की दृष्टि से भी अहम है।













