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हर टोल प्लाजा पर मिलेगी एंबुलेंस, 112 इमरजेंसी नंबर से होंगी कनेक्ट; सरकार ने तैयार किया पायलट प्रोजेक्ट

On: September 8, 2026
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हर टोल प्लाजा पर मिलेगी एंबुलेंस, 112 इमरजेंसी नंबर से होंगी कनेक्ट
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नई दिल्ली/08 सितंबर 2026: सड़क हादसों में घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर एंबुलेंस सेवा का विस्तार करने की तैयारी तेज कर दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की योजना के तहत देश के प्रत्येक टोल प्लाजा पर कम से कम एक एंबुलेंस तैनात करने का प्रस्ताव है। इन एंबुलेंस का संचालन संबंधित राज्य सरकारों की आपातकालीन सेवा के तहत किया जाएगा।

खास बात यह है कि इन एंबुलेंस को 112 इमरजेंसी टोल फ्री नंबर से जोड़ा जाएगा, ताकि दुर्घटना की सूचना मिलते ही नजदीकी एंबुलेंस को घटनास्थल पर भेजा जा सके। केंद्र सरकार एंबुलेंस उपलब्ध कराने के साथ उनके संचालन से जुड़े खर्च में भी सहयोग करेगी। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाने की तैयारी है।

हर टोल प्लाजा पर एंबुलेंस तैनात करने की तैयारी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर चिकित्सा आपातकालीन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान में एनएचएआई केयर के तहत करीब 3,000 एंबुलेंस पहले से संचालित हैं।

अब इस व्यवस्था को राज्यों की आपातकालीन सेवाओं के साथ जोड़कर और व्यापक बनाने की योजना है। प्रस्ताव के मुताबिक, प्रत्येक टोल प्लाजा पर राज्य सरकार की ओर से भी एक एंबुलेंस चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी।

केंद्र सरकार केवल एंबुलेंस उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसके संचालन से जुड़े खर्च को भी वहन करने की व्यवस्था तैयार कर रही है। हालांकि, खर्च और संचालन की विस्तृत शर्तें दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होंगी।

1.46 लाख किलोमीटर लंबा है नेशनल हाईवे नेटवर्क

देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क करीब 1.46 लाख किलोमीटर लंबा है। सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठाए जाने के बावजूद सड़क दुर्घटनाएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में सड़क हादसों में करीब 1.83 लाख लोगों की जान गई। ऐसे में हादसे के बाद घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में लगने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

सरकार का प्रयास है कि दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन आवर’ में घायल को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। टोल प्लाजा पर एंबुलेंस की उपलब्धता बढ़ाने की योजना इसी सोच का हिस्सा है।

राज्यों को एंबुलेंस संचालन की जिम्मेदारी

मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में तुलनात्मक रूप से कमी आई है, लेकिन सड़क सुरक्षा को लेकर प्रयास लगातार जारी हैं।

उन्होंने बताया कि देश में करीब 1,200 टोल प्लाजा हैं। इनमें लगभग 500 टोल प्लाजा पर फिलहाल एंबुलेंस तैनात हैं। अब बाकी टोल प्लाजा को भी एंबुलेंस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था में एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी। यानी दुर्घटना की सूचना मिलने पर संबंधित राज्य की आपातकालीन सेवा इन वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचाने और आगे की चिकित्सा सहायता के लिए इस्तेमाल करेगी।

112 इमरजेंसी सेवा से जुड़ेगी एंबुलेंस

नई व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी 112 इमरजेंसी सेवा होगी। राज्यों के लिए शर्त रखी जाएगी कि टोल प्लाजा पर उपलब्ध कराई जाने वाली एंबुलेंस को उनके आपातकालीन टोल फ्री नंबर 112 से जोड़ा जाए।

इसका उद्देश्य यह है कि दुर्घटना की सूचना मिलने पर कॉल सेंटर और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो तथा उपलब्ध सबसे नजदीकी एंबुलेंस को तुरंत भेजा जा सके।

मंत्रालय की सोच है कि एनएचएआई केयर सिस्टम और राज्यों की 112 आपातकालीन सेवा के बीच बेहतर कॉर्डिनेशन होने पर दुर्घटना पीड़ितों तक मदद पहुंचने का समय कम किया जा सकेगा।

जहां टोल गेट नहीं, वहां जरूरत के हिसाब से होगी तैनाती

देश के कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर मल्टीलेन फ्री फ्लो व्यवस्था लागू होने के कारण पारंपरिक टोल गेट नहीं हैं। ऐसे स्थानों पर प्रत्येक टोल प्लाजा पर एंबुलेंस तैनात करने का सवाल अलग तरीके से हल किया जाएगा।

मंत्रालय के मुताबिक, ऐसे क्षेत्रों में राज्य सरकारें जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए एंबुलेंस की तैनाती करेंगी। इसका मकसद केवल टोल बूथ पर वाहन खड़ा करना नहीं, बल्कि हादसे की स्थिति में कम से कम समय में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

संसद में की गई घोषणा पर आगे बढ़ा मंत्रालय

सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने को लेकर केंद्र सरकार पहले ही राज्यों के सामने यह प्रस्ताव रख चुकी है। संसद के पिछले सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यसभा में कहा था कि यदि राज्य सरकारें एंबुलेंस का संचालन करें और 10 मिनट के भीतर दुर्घटनास्थल तक एंबुलेंस पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें, तो केंद्र सरकार एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

अब मंत्रालय ने इसी दिशा में काम तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में एंबुलेंस की तैनाती, संचालन, खर्च और राज्यों की जिम्मेदारियों से संबंधित विस्तृत नियम जारी किए जा सकते हैं।

हादसे के बाद हर मिनट अहम, नई व्यवस्था से उम्मीद

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। एंबुलेंस घटनास्थल तक जितनी जल्दी पहुंचे और घायल को उचित चिकित्सा केंद्र तक ले जाया जाए, गंभीर मामलों में बचाव की संभावना उतनी ही बेहतर हो सकती है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा को एंबुलेंस सेवा के एक मजबूत नेटवर्क से जोड़ने की योजना इसी चुनौती का जवाब देने की कोशिश है। यदि 112 सेवा, राज्य आपातकालीन तंत्र और एनएचएआई केयर के बीच समन्वय जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो सड़क हादसों के बाद राहत पहुंचाने की मौजूदा व्यवस्था को निश्चित रूप से मजबूती मिल सकती है।

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