नई दिल्ली/10 सितंबर 2026: भारत की अध्यक्षता में BRICS सम्मेलन 2026 का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में होगा। दो दिन चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता भी हिस्सा लेंगे। वैश्विक शासन व्यवस्था, बहुपक्षवाद, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास जैसे मुद्दे इस सम्मेलन के केंद्र में रहेंगे।
सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। विदेशी मेहमानों की आवाजाही, उनके ठहरने की व्यवस्था और भारत मंडपम के आसपास सुरक्षा को लेकर एजेंसियां लगातार तैयारियों को अंतिम रूप दे रही हैं। ऐसे में जानते हैं कि BRICS सम्मेलन 2026 में दो दिनों के दौरान क्या होगा, कौन-कौन से नेता शामिल होंगे और दिल्ली में क्या इंतजाम किए गए हैं।
12 सितंबर को BRICS सम्मेलन में क्या-क्या होगा?
BRICS सम्मेलन के पहले दिन केवल सदस्य देशों के नेताओं की प्रमुख बैठकों और कार्यक्रमों पर फोकस रहेगा। विदेश मंत्रालय के कार्यक्रम के मुताबिक, सदस्य देशों के नेताओं का भारत मंडपम पहुंचने का सिलसिला दोपहर करीब 2 बजे शुरू होगा।
इसके बाद दोपहर 2:35 बजे शिखर सम्मेलन सभागार में बंद सत्र आयोजित किया जाएगा। इसका विषय ‘इन्क्लूसिव ग्लोबल गवर्नेंस एंड स्ट्रेंथनिंग मल्टीलैटरलिज्म’ रखा गया है। इस सत्र में वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
शाम 4:25 बजे BRICS सदस्य देशों के नेता भारत मंडपम के हॉल-14 में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इसके बाद शाम 5:05 बजे भारत मंडपम के बाहरी लॉन में सभी नेता सामूहिक तस्वीर के लिए एक साथ आएंगे।
सामूहिक तस्वीर के करीब पांच मिनट बाद यानी 5:10 बजे संयुक्त पौधारोपण कार्यक्रम होगा। पहले दिन के औपचारिक कार्यक्रमों का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित रात्रिभोज के साथ होगा। यह रात्रिभोज भारत मंडपम के लेवल-3 पर आयोजित किया जाएगा।
13 सितंबर को साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता होंगे शामिल
सम्मेलन के दूसरे दिन BRICS के साझेदार और आमंत्रित देशों के राष्ट्राध्यक्ष तथा सरकार प्रमुख भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। इन नेताओं का भारत मंडपम पहुंचना सुबह 9:55 बजे प्रस्तावित है।
इसके बाद सुबह 10:35 बजे सामूहिक तस्वीर होगी। फिर सुबह 10:50 बजे शिखर सम्मेलन का खुला सत्र शुरू होगा। यह सत्र भारत मंडपम के लेवल-2 स्थित शिखर सम्मेलन सभागार में आयोजित किया जाएगा।
इस सत्र का विषय है—‘रिजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इन्क्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ’। इसका फोकस लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के जरिए समावेशी वैश्विक विकास का रास्ता तैयार करने पर रहेगा।
BRICS सम्मेलन में कौन-कौन से बड़े नेता पहुंचेंगे?
भारत की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन में कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख हिस्सा लेंगे। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रमुख नाम हैं।
इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
साझेदार देशों की ओर से बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल के शामिल होने की बात कही गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना बताई गई है, हालांकि उनकी औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
पुतिन और शी जिनपिंग की मौजूदगी क्यों अहम?
इस बार BRICS सम्मेलन 2026 में रूस और चीन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी भारत के लिए खास महत्व रखती है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह एक साल से भी कम अवधि में दूसरी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वह दिसंबर 2025 में वार्षिक भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान पुतिन से मुलाकात की थी। इसी दौरान उन्हें BRICS सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दोबारा दिया गया था।
वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात साल बाद हो रही है। ऐसे में उनकी मौजूदगी केवल BRICS की बैठक तक सीमित महत्व नहीं रखती। भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों की मौजूदा स्थिति के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी पर भी स्वाभाविक रूप से नजर रहेगी।
भारत में चीन के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने BRICS सम्मेलन को दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का अवसर बताया है। उन्होंने व्यापार, कनेक्टिविटी, जलवायु कार्रवाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई है।
दिल्ली में 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद व्यापक बनाया गया है। सम्मेलन की सुरक्षा के लिए करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
एयरपोर्ट, विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले 11 होटलों और भारत मंडपम के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था में एंटी-ड्रोन सिस्टम भी शामिल किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां तैयारियों को परखने के लिए लगातार मॉक ड्रिल कर रही हैं।
विदेशी नेताओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष रूट निर्धारित किए गए हैं। उनके काफिलों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए इन मार्गों पर रूट रिहर्सल भी की गई है। रूस और चीन के नेताओं के बड़े काफिलों को देखते हुए उनके संभावित रास्तों पर विशेष सुरक्षा और यातायात प्रबंधन किया जा रहा है।
35 से अधिक सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था बदलेगी
सम्मेलन के दौरान 11 से 13 सितंबर तक दिल्ली की 35 से अधिक सड़कों पर यातायात नियंत्रित या डायवर्ट किया जाएगा। इसके लिए 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं।
VIP काफिलों के गुजरने के दौरान कुछ मार्गों पर थोड़ी देर के लिए यातायात रोका भी जा सकता है। ऐसे में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और नई दिल्ली के प्रमुख इलाकों की ओर जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने और यात्रा से पहले ट्रैफिक की ताजा स्थिति देखने की सलाह दी गई है।
यातायात दबाव कम करने के लिए 11 सितंबर को दिल्ली में स्कूलों और कुछ सरकारी कार्यालयों के लिए अवकाश रखा गया है। वहीं, 12 सितंबर को प्रस्तावित राष्ट्रीय लोक अदालत को अब 10 अक्टूबर के लिए पुनर्निर्धारित किया गया है। कुछ अन्य सुनवाइयों की तारीखों में भी बदलाव किया गया है।
BRICS के लोगो में कमल और ‘नमस्ते’ का क्या संदेश?
भारत की BRICS अध्यक्षता के लोगो में परंपरा और आधुनिकता का मेल दिखाई देता है। इसके केंद्र में बना कमल पवित्रता, लचीलेपन और प्रगति का प्रतीक है। कमल की पंखुड़ियों में BRICS के सदस्य देशों के जीवंत रंगों को शामिल किया गया है, जो समूह की सामूहिक शक्ति और एकता का संकेत देते हैं।
लोगो के केंद्र में ‘नमस्ते’ की भावना भारत की गर्मजोशी, सम्मान और सहयोग की परंपरा को दर्शाती है। यानी लोगो को केवल एक डिजाइन के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की अध्यक्षता की सोच और प्राथमिकताओं के प्रतीक के रूप में पेश किया गया है।
इस बार BRICS का थीम क्या है?
भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता का थीम है—‘बिल्डिंग फॉर रिजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’।
सरल शब्दों में इसका अर्थ है लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के आधार पर भविष्य का निर्माण। यह थीम विकास की प्रक्रिया में लोगों को केंद्र में रखने और ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ यानी मानवता को प्राथमिकता देने की सोच को सामने रखती है।
2026 में BRICS सम्मेलन भारत के लिए क्यों अहम?
वर्ष 2026 BRICS के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि समूह अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। इसी साल भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत वर्ष 2012, 2016 और 2021 में समूह की अध्यक्षता कर चुका है।
इस बार भारत के पास BRICS के एजेंडे को अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। नई दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन इसी प्रक्रिया का सबसे बड़ा मंच होगा।
भारत की अध्यक्षता में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करना, व्यापार और वित्तीय सहयोग, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा तथा सतत विकास जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
BRICS का विस्तार होने के बाद समूह की भूमिका वैश्विक अर्थव्यवस्था और बहुपक्षीय व्यवस्था में और व्यापक हुई है। ऐसे में दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन केवल दो दिन का राजनयिक आयोजन नहीं है। इसके जरिए भारत यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि विकास, तकनीक और वैश्विक सहयोग के बड़े सवालों पर उभरती अर्थव्यवस्थाएं मिलकर एक अधिक संतुलित और समावेशी व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।













