प्रयागराज/14 सितंबर 2026: प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़ी बड़ी घोषणा की। उन्होंने हाईकोर्ट और जनपद न्यायालयों के अधिवक्ताओं के लिए कैशलेश इलाज की सुविधा से जुड़ी सहायता राशि बढ़ाने का ऐलान करते हुए अधिवक्ता कल्याण निधि को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ताओं के कल्याण से संबंधित हाईकोर्ट की ओर से जो भी प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उस पर पूरा सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से अपील की कि वे कानून को केवल पेशे के रूप में न देखें, बल्कि न्यायपालिका को मजबूत करने और आम नागरिक के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा कायम रखने में भी अपनी भूमिका निभाएं।
कैशलेश इलाज की सुविधा से अधिवक्ताओं को राहत
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है। सरकार की कोशिश ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जहां निर्दोष व्यक्ति को भयभीत होने की जरूरत न पड़े, अपराधी कानून से बच न सके और प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के समय पर न्याय मिले।
उन्होंने कहा कि बार और बेंच न्याय व्यवस्था के रथ के दो पहिए हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, संवाद, शिष्टाचार और सहयोग लगातार बना रहना चाहिए। मजबूत बार और प्रभावी बेंच के समन्वय से ही न्याय व्यवस्था बेहतर ढंग से आगे बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप काम करते हैं। न्यायपालिका विधि का शासन स्थापित करने और सुशासन के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक पक्ष की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
हिंदी दिवस और पर्वों पर दी शुभकामनाएं
प्रयागराज की धरती से मुख्यमंत्री ने हिंदी दिवस, हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में भगवान गणपति को बुद्धि और विवेक के देवता के रूप में पूजा जाता है। वहीं हरितालिका तीज भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है।
स्वतंत्रता आंदोलन में प्रयागराज के अधिवक्ताओं की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश के प्रबुद्ध समाज में अधिवक्ता वर्ग की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समाज की विचारधारा को दिशा देने से लेकर संविधान निर्माण और स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने तक अधिवक्ताओं ने उल्लेखनीय योगदान दिया।
प्रयागराज इसका प्रत्यक्ष गवाह रहा है। यहां विधि व्यवसाय से जुड़े अनेक लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने मोतीलाल नेहरू और महामना मदन मोहन मालवीय का उल्लेख करते हुए कहा कि इन जैसे अधिवक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा देने के साथ क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के पक्ष में भी मजबूती से आवाज उठाई।
400 राज्य विधि अधिकारियों को मिलेंगे टैबलेट
मुख्यमंत्री ने न्यायिक और अभियोजन व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें सरकार से जुड़े न्यायालयों में लंबित मुकदमों और उनकी स्थिति की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
योगी ने कहा कि तकनीक के इस दौर में न्याय व्यवस्था को भी आधुनिक साधनों से जोड़ना जरूरी है। इससे सूचनाओं तक पहुंच आसान होगी और मुकदमों की निगरानी तथा प्रभावी पैरवी में भी मदद मिलेगी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संगम में स्नान करने पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद का स्मरण स्वाभाविक रूप से होता है। वह कुंभ और माघ मेले के दौरान प्रयागराज में लंबे समय तक रहते थे और कल्पवास भी करते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका कल्पवास केवल निजी आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्र जीवन के लिए निर्धारित मर्यादा और राष्ट्रसेवा के संकल्प से भी जुड़ा था। राष्ट्रपति बनने के बाद सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक चेतना और विरासत के प्रति सम्मान का संदेश दिया था।
योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया है। विश्वविद्यालय का काम शुरू हो चुका है और जल्द ही इसका भव्य परिसर तैयार होगा।
2017 से पहले न्यायिक व्यवस्था के सामने थीं कई चुनौतियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश के सामने केवल संसाधनों की कमी नहीं थी, बल्कि व्यवस्था से जुड़ी भी कई चुनौतियां थीं। प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक आधारभूत ढांचे में सुधार की जरूरत थी।
उन्होंने पुलिस व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। भर्ती शुरू होने के बाद एक बड़ी चुनौती नए कर्मियों को प्रशिक्षण देने की थी। उस समय प्रदेश पुलिस एक वर्ष में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को ही प्रशिक्षण दे पाती थी।
सरकार ने प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाकर सात हजार करने के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पुलिसकर्मी 12-12 घंटे ड्यूटी करते हैं, उनके लिए बेहतर आवास और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
अधीनस्थ न्यायालयों में आधारभूत सुविधाओं पर जोर
योगी ने कहा कि न्यायपालिका के लिए भी बेहतर आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं। पहले कई अधीनस्थ न्यायालय किराए के भवनों में संचालित होते थे और अधिवक्ताओं के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। सरकार ने इस स्थिति में बदलाव के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में गवाहों के मुकर जाने से दोषियों को सजा दिलाने में परेशानी आती थी। इसके अलावा अपराधियों को जेल से अदालत तक लाने के दौरान सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती थीं। अब इन व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
ऑनलाइन हुई अभियोजन प्रणाली, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में तेजी
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन किया गया है। जेलों और न्यायालयों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है, ताकि मुकदमों की सुनवाई में लगने वाले समय को कम किया जा सके।
साक्ष्य समय पर अदालत के सामने पेश हों, इसके लिए भी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। न्यायिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण और उनके सुरक्षित रखरखाव की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
एकीकृत न्यायालय परिसर की दिशा में भी काम किए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी। उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के प्रयासों से इस अवधारणा को आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत एक ही परिसर में अलग-अलग न्यायिक कार्यों के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, आवासीय सुविधाएं, खेल सुविधाएं, इनडोर स्टेडियम और कैंटीन जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने की योजना है।
प्रदेश में 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दिए जाने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक चैंबर, पुस्तकालय और सामुदायिक कक्ष आदि के निर्माण की दिशा में काम चल रहा है।
अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ता की मृत्यु की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि में वृद्धि की गई है। साथ ही 70 वर्ष की आयु तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। कौशांबी, श्रावस्ती और कासगंज समेत विभिन्न जिलों में अधिवक्ताओं से जुड़ी जरूरतों के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, विधायक दीपक पटेल समेत अन्य जनप्रतिनिधि और अधिवक्ता मौजूद रहे।









