लखनऊ, 15 सितंबर 2026। चित्रकूट धाम की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। करीब 15 किलोमीटर लंबा यह प्रवेश नियंत्रित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को सीधे चित्रकूट धाम से जोड़ेगा।
परियोजना के तहत 15.17 किलोमीटर लंबे छह लेन के एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 1008.67 करोड़ रुपये है। खास बात यह है कि परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था का चयन वैश्विक निविदा के माध्यम से किया जाएगा।
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव
प्रस्तावित चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के प्रारंभिक बिंदु से शुरू होकर चित्रकूट धाम तक पहुंचेगा। प्रवेश नियंत्रित होने के कारण इस मार्ग पर यातायात को अधिक व्यवस्थित और सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए पहले से ही बुंदेलखंड क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों को बेहतर सड़क संपर्क मिला है। अब उसे चित्रकूट धाम से सीधे जोड़ने की योजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को एक और विस्तार देगी।
परियोजना पूरी होने के बाद चित्रकूट जाने वाले यात्रियों को अधिक सीधा और सुविधाजनक मार्ग मिल सकेगा। इसका असर केवल यात्रा के समय तक सीमित नहीं रहने वाला है। बेहतर सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाता है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया रास्ता
चित्रकूट धाम धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है। भगवान राम से जुड़ी मान्यताओं के कारण यहां वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आवागमन रहता है।
वर्तमान में अलग-अलग मार्गों से चित्रकूट पहुंचने वाले यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से सीधे चित्रकूट तक पहुंचना आसान हो सकता है।
सरकार को उम्मीद है कि इससे चित्रकूट और आसपास के इलाकों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, खान-पान और दूसरी सेवाओं से जुड़े कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
यानी यह परियोजना सिर्फ सड़क बनाने तक सीमित नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी चित्रकूट की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक नया अवसर पैदा कर सकती है।
14,429 परिषदीय स्कूल बनेंगे स्मार्ट, 300 करोड़ की योजना
कैबिनेट बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक अहम प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। प्रदेश के 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना को स्वीकृति दी गई है।
इस योजना पर कुल 300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के मुताबिक, एक विद्यालय में स्मार्ट क्लास तैयार करने की लागत 2,07,910 रुपये होगी।
योजना के तहत अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब विकसित की जाएंगी। इसका मकसद सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को डिजिटल संसाधनों से जोड़ना है।
स्मार्ट क्लास में मिलेंगी डिजिटल सुविधाएं
स्मार्ट स्कूल योजना के तहत विद्यालयों में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, पावर बैकअप, इलेक्ट्रिकल एवं सुरक्षा उपकरण, ऑडियो-विजुअल सामग्री, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और डिजिटल एजुकेशन कंटेंट शामिल हैं।
इसके अलावा सुरक्षा सॉफ्टवेयर, वाई-फाई कनेक्टिविटी और हेल्प डेस्क जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे बच्चों को किताबों और ब्लैकबोर्ड आधारित पढ़ाई के साथ डिजिटल माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।
बच्चों के लिए पढ़ाई होगी ज्यादा रोचक
डिजिटल कक्षाओं का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि शिक्षक कठिन विषयों को केवल मौखिक व्याख्या तक सीमित रखने के बजाय वीडियो, चित्र और अन्य डिजिटल सामग्री के माध्यम से समझा सकेंगे।
खासकर विज्ञान, गणित और दूसरे ऐसे विषयों में जहां किसी प्रक्रिया या अवधारणा को दृश्य माध्यम से समझाना आसान होता है, स्मार्ट क्लास उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि इस योजना की वास्तविक सफलता केवल उपकरण लगाने से नहीं, बल्कि शिक्षकों द्वारा उनके प्रभावी इस्तेमाल और नियमित संचालन पर भी निर्भर करेगी।
एक तरफ चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए सरकार धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय व्यापार को गति देने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर परिषदीय स्कूलों को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने का फैसला बुनियादी शिक्षा के स्तर पर बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।









