लखनऊ/15 सितंबर 2026: मथुरा की लंबे समय से बंद पड़ी छाता चीनी मिल को फिर से सक्रिय करने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मिल परिसर में ड्यूल मोड आधारित एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस संयंत्र की खासियत यह होगी कि इसमें गन्ने के साथ-साथ मक्का और धान से भी एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकेगा।
प्रस्तावित प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर एथेनॉल होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसी महीने परियोजना का शिलान्यास किए जाने की संभावना है। करीब 19 वर्षों से बंद मिल परिसर में इस परियोजना के आने से औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
छाता चीनी मिल में ड्यूल मोड एथेनॉल प्लांट की तैयारी
गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि छाता चीनी मिल का संचालन पिछले 19 वर्षों से बंद है। अब उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के अधीन इस मिल में कंसेशन-कम-लीज व्यवस्था के तहत ड्यूल मोड आधारित एथेनॉल प्लांट स्थापित कराया जाएगा।
ड्यूल मोड तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कच्चे माल को लेकर लचीलापन है। सामान्य तौर पर किसी डिस्टिलरी की उत्पादन व्यवस्था एक खास कच्चे माल पर अधिक निर्भर रहती है, लेकिन इस संयंत्र में गन्ने, मक्का और धान से एथेनॉल बनाया जा सकेगा। इससे कच्चे माल की उपलब्धता के अनुसार उत्पादन व्यवस्था को समायोजित करना आसान होगा।
प्लांट वर्ष में करीब 11 महीने संचालित किया जाएगा और इसकी न्यूनतम उत्पादन क्षमता 120 किलोलीटर प्रतिदिन होगी।
20 एकड़ में निजी निवेश से बनेगा संयंत्र
प्रस्ताव के अनुसार छाता चीनी मिल की करीब 20 एकड़ भूमि पर निजी निवेश के माध्यम से एथेनॉल संयंत्र स्थापित किया जाएगा। परियोजना पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मंत्री के मुताबिक, क्षेत्र में जब गन्ने की उपलब्धता बढ़ेगी तो भविष्य में चीनी मिल को भी दोबारा शुरू किया जाएगा। इसके साथ बिजली उत्पादन के लिए को-जेनरेशन प्लांट स्थापित करने की योजना है। यानी परियोजना को केवल एथेनॉल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय मिल परिसर में एक व्यापक औद्योगिक गतिविधि विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
नोएडा एयरपोर्ट की नजदीकी से बढ़ेगी कारोबारी संभावनाएं
छाता चीनी मिल की लोकेशन भी इस परियोजना के लिए अहम मानी जा रही है। मिल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और यहां से नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट करीब 40 मिनट की दूरी पर है।
मिल परिसर के पास करीब 96 एकड़ जमीन उपलब्ध है। ऐसे में भविष्य में यहां वेयरहाउस और कॉम्प्लेक्स जैसी गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं। एथेनॉल प्लांट के साथ परिवहन, भंडारण और दूसरे सहायक कारोबार विकसित होने पर आसपास के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
सरकार का अनुमान है कि परियोजना से हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लंबे समय से बंद औद्योगिक परिसर में फिर से उत्पादन गतिविधियां शुरू होना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2002 से 2007 के दौर का मंत्री ने किया जिक्र
गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने मिल के बंद होने के पीछे पुराने गन्ना मूल्य भुगतान संकट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से 2007 के बीच सपा सरकार के समय गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण छाता चीनी मिल बंद हो गई थी।
अब सरकार की कोशिश बंद पड़ी इस संपत्ति को दोबारा आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की है। एथेनॉल परियोजना को इसी व्यापक योजना की पहली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
तीन चीनी मिलों को 350 करोड़ रुपये की शासकीय गारंटी
कैबिनेट ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश की तीन चीनी मिलों को शासकीय गारंटी देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसमें मेरठ की मोहिउद्दीनपुर, गोरखपुर की पिपराईच और बस्ती की मुंडेरवा चीनी मिल शामिल हैं।
इन तीनों मिलों को बैंक से ऋण लेने में सुविधा देने के लिए कुल 350 करोड़ रुपये की शासकीय गारंटी स्वीकृत की गई है।
- मोहिउद्दीनपुर चीनी मिल, मेरठ: 150 करोड़ रुपये
- पिपराईच चीनी मिल, गोरखपुर: 100 करोड़ रुपये
- मुंडेरवा चीनी मिल, बस्ती: 100 करोड़ रुपये
सरकार का कहना है कि इससे इन चीनी मिलों को कार्यशील पूंजी के लिए बैंक ऋण हासिल करने में आसानी होगी। इसका सीधा उद्देश्य पेराई सत्र के दौरान किसानों को गन्ने का मूल्य समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
एक नजर में प्रमुख तथ्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| परियोजना | ड्यूल मोड एथेनॉल प्लांट |
| स्थान | छाता चीनी मिल, मथुरा |
| मिल बंद | करीब 19 वर्ष |
| वार्षिक एथेनॉल उत्पादन | 3.96 करोड़ लीटर |
| न्यूनतम क्षमता | 120 किलोलीटर प्रतिदिन |
| संचालन | वर्ष में 11 महीने |
| एथेनॉल के कच्चे माल | गन्ना, मक्का और धान |
| प्लांट के लिए भूमि | 20 एकड़ |
| कुल अनुमानित लागत | 200 करोड़ रुपये |
| मिल के पास उपलब्ध भूमि | 96 एकड़ |
| नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से दूरी | करीब 40 मिनट |
| प्रस्तावित अतिरिक्त सुविधा | को-जेनरेशन प्लांट |
| 2026-27 के लिए तीन मिलों की शासकीय गारंटी | 350 करोड़ रुपये |









