नई दिल्ली/29 अक्टूबर 2026: हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए डिजी यात्रा से जुड़ी एक नई सुविधा शुरू होने जा रही है। अब ई-पासपोर्ट रखने वाले पात्र भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के दौरान भी डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए 1 नवंबर 2026 से देश के सात प्रमुख हवाई अड्डों पर ट्रायल शुरू करने की योजना है। इस सुविधा के जरिए यात्री एयरपोर्ट में प्रवेश, सुरक्षा जांच वाले क्षेत्र और बोर्डिंग गेट तक पहुंचने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बना सकेंगे।
पहले चरण में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, चेन्नई और अमृतसर हवाई अड्डों को इस पहल में शामिल किया गया है। ट्रायल दिसंबर 2026 तक चलने की योजना है। इसके बाद यात्रियों की प्रतिक्रिया और परीक्षण के नतीजों के आधार पर 2027 में इसका विस्तार करने पर विचार किया जाएगा।
Digi Yatra International: किन 7 एयरपोर्ट पर मिलेगी सुविधा?
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए डिजी यात्रा की डिजिटल पहचान सुविधा शुरुआती चरण में सात हवाई अड्डों पर उपलब्ध कराने की योजना है। इसका लाभ केवल पात्र भारतीय नागरिकों को मिलेगा, जिनके पास ई-पासपोर्ट होगा और जिन्होंने डिजी यात्रा एप के माध्यम से आवश्यक डिजिटल पहचान तैयार की होगी।
शुरुआती चरण में शामिल हवाई अड्डे हैं:
- इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली
- छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई
- केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेंगलुरु
- राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद
- कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोच्चि
- चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, चेन्नई
- श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अमृतसर
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एयर इंडिया की पात्र अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्री इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे। इंडिगो के यात्रियों के लिए यह सुविधा चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उपलब्ध होगी। यात्रियों को अपनी उड़ान और एयरपोर्ट पर इसकी उपलब्धता पहले जांच लेनी चाहिए।
ई-पासपोर्ट से Digi Yatra ID कैसे बनेगी?
डिजी यात्रा की अंतरराष्ट्रीय सुविधा का लाभ लेने के लिए यात्रियों को यात्रा से पहले मोबाइल एप पर अपनी डिजिटल पहचान तैयार करनी होगी। इसके लिए ई-पासपोर्ट और एनएफसी यानी नियर फील्ड कम्युनिकेशन तकनीक वाले स्मार्टफोन की जरूरत होगी।
डिजिटल पहचान बनाने की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
- पहला चरण: यात्री डिजी यात्रा एप में डिजिटल पहचान बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
- दूसरा चरण: ई-पासपोर्ट पर मौजूद मशीन से पढ़ी जाने वाली जानकारी को स्कैन किया जाएगा।
- तीसरा चरण: एनएफसी सुविधा वाले स्मार्टफोन से पासपोर्ट की इलेक्ट्रॉनिक चिप पढ़ी जाएगी।
- चौथा चरण: यात्री अपनी सेल्फी लेकर पहचान संबंधी विवरण की पुष्टि करेगा।
- पांचवां चरण: प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिजिटल पहचान डिजी यात्रा वॉलेट में सुरक्षित रहेगी।
इसके बाद पात्र यात्री संबंधित एयरपोर्ट पर उपलब्ध डिजी यात्रा सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, डिजिटल पहचान बनाने के बाद भी यात्रियों को उड़ान के लिए लागू सभी जरूरी नियमों का पालन करना होगा।
क्या डिजी यात्रा से पासपोर्ट और इमिग्रेशन की जरूरत खत्म हो जाएगी?
नहीं। डिजी यात्रा की डिजिटल पहचान सुविधा अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जरूरी दस्तावेजों का विकल्प नहीं है। यात्रियों को अपना वैध पासपोर्ट, बोर्डिंग पास और अन्य आवश्यक दस्तावेज साथ रखने होंगे।
इमिग्रेशन जांच, एयरलाइन की दस्तावेज जांच और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़ी दूसरी औपचारिकताएं भी पहले की तरह पूरी करनी होंगी। डिजी यात्रा का उद्देश्य एयरपोर्ट के कुछ चरणों में डिजिटल पहचान के माध्यम से प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना है, न कि मौजूदा यात्रा नियमों को समाप्त करना।
यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सुविधा का इस्तेमाल संबंधित एयरपोर्ट के तकनीकी ढांचे, उड़ान की पात्रता और लागू प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
Digi Yatra App में क्या-क्या बदलाव हुए हैं?
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए ट्रायल की तैयारी के साथ डिजी यात्रा एप का नया डिजाइन भी पेश किया गया है। इसका उद्देश्य एप को अधिक सरल बनाना और यात्रियों को डिजिटल पहचान से जुड़ी सुविधाओं का इस्तेमाल आसानी से समझने में मदद करना है।
नए डिजाइन में कई बदलाव किए गए हैं:
- एप के इंटरफेस को अधिक सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है।
- बोर्डिंग पास दिखाने के तरीके में बदलाव किया गया है।
- बोर्डिंग पास के डिजाइन में संबंधित एयरलाइन के रंगों का इस्तेमाल किया गया है।
- डिजिटल पहचान से जुड़े दस्तावेजों को रखने वाले वॉलेट को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया गया है।
- अभिभावकों और नाबालिगों की डिजिटल पहचान से संबंधित संकेतों में सुधार किया गया है।
- सहमति देने वाली स्क्रीन को नया रूप दिया गया है, ताकि यात्रियों को जानकारी साझा करने की प्रक्रिया समझने में आसानी हो।
सहमति से जुड़ी स्क्रीन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके जरिए यात्रियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी जानकारी साझा की जा रही है, किसके साथ साझा की जा रही है और उसका उद्देश्य क्या है। डिजिटल पहचान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी अहम मुद्दे हैं।
Digi Yatra के 2.65 करोड़ से ज्यादा यूजर्स
डिजी यात्रा का इस्तेमाल देश में लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इसके 2.65 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इस सुविधा के जरिए 11 करोड़ से ज्यादा यात्राएं हो चुकी हैं।
फिलहाल यह सेवा देश के 39 घरेलू हवाई अड्डों पर उपलब्ध बताई गई है। इससे 11 घरेलू एयरलाइंस जुड़ी हैं। एयरपोर्ट पर औसतन करीब 30 फीसदी यात्री इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं।
डिजी यात्रा के विस्तार की योजना केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक सीमित नहीं है। 2027 तक 25 और घरेलू हवाई अड्डों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही एप को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध कराने की योजना है। फिलहाल यह 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध बताया गया है।
2027 में देशभर में विस्तार की तैयारी
डिजी यात्रा की अंतरराष्ट्रीय सुविधा का प्रस्तावित ट्रायल डिजिटल पहचान के इस्तेमाल को एक नए स्तर पर ले जा सकता है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो 2027 में इसके व्यापक विस्तार का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि डिजिटल सुविधा का लाभ लेने से पहले वे अपने ई-पासपोर्ट, स्मार्टफोन, उड़ान की पात्रता और संबंधित एयरपोर्ट पर उपलब्ध व्यवस्था की पुष्टि कर लें। अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेजों को साथ रखना अब भी अनिवार्य रहेगा।













