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दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026: नौसेना प्रमुख बोले- भारत के लिए आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत, 2047 तक नौसेना को बनाना है पूरी तरह सक्षम

On: November 3, 2026
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दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026, नौसेना प्रमुख बोले- भारत के लिए आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत
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नई दिल्ली (03 नवंबर 2026)। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और लगातार बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने मंगलवार को दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए आत्मनिर्भरता केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना को ऐसी क्षमता विकसित करनी होगी, जिससे वह किसी बाहरी निर्भरता के बिना युद्ध लड़ने, उसे जारी रखने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम हो।

नौसेना प्रमुख ने वैश्विक संघर्षों के आर्थिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में हिंसा और संघर्षों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 21.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह वैश्विक जीडीपी का लगभग 10.5 प्रतिशत है। ऐसे हालात में रक्षा तैयारियों और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 में वैश्विक संघर्षों पर क्या बोले नौसेना प्रमुख?

दिल्ली डिफेंस डायलॉग के दौरान एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि दुनिया में राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ पुराने विवाद फिर उभर रहे हैं। कई देशों में सैन्य ताकत का इस्तेमाल राष्ट्रीय नीति के एक प्रमुख साधन के रूप में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों का असर केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहता। इससे आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित होती हैं, सैन्य संसाधनों की उपलब्धता पर दबाव पड़ता है और देशों की परिचालन क्षमताओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी होती हैं।

नौसेना प्रमुख के मुताबिक, यूक्रेन में जारी संघर्ष जैसे उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी देश की सैन्य क्षमता बाहरी आपूर्ति और तकनीकी निर्भरता से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी संसाधनों और तकनीक पर अधिक भरोसा करना होगा।

2047 तक भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारतीय नौसेना का लक्ष्य वर्ष 2047 तक ऐसी सेना तैयार करना है, जो अपनी जरूरतों के लिए बाहरी निर्भरता से मुक्त हो।

उन्होंने कहा कि नौसेना को ऐसी क्षमता विकसित करनी होगी, जिससे वह बिना किसी बाहरी व्यक्ति, एजेंसी या अन्य कारक की बाधा के स्वतंत्र रूप से युद्ध लड़ सके, उसे जारी रख सके और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव कर सके।

नौसेना प्रमुख ने आत्मनिर्भरता को देश की व्यापक रणनीतिक सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य क्षमताओं, संसाधनों और तकनीक में स्वदेशी विकास बेहद जरूरी है।

उनके अनुसार, आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं है। भारत को मित्र देशों के साथ सहयोग भी करना चाहिए, लेकिन यह सहयोग कमजोरी के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी मजबूत क्षमताओं के साथ होना चाहिए।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और अनुसंधान पर जोर

नौसेना प्रमुख ने भविष्य की सैन्य चुनौतियों को देखते हुए अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण तकनीकी कमियों को दूर करना और उभरती तकनीकों में क्षमता विकसित करना आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रयोगशालाओं और नवाचार के स्तर पर विकसित तकनीक को जल्द से जल्द वास्तविक सैन्य क्षमताओं में बदलने की जरूरत है। केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका समय पर परिचालन उपयोग भी महत्वपूर्ण है।

एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि आज तकनीक तेजी से आम लोगों और विभिन्न संगठनों तक पहुंच रही है। इसका इस्तेमाल अच्छे और बुरे दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इसलिए भारतीय नौसेना को आधुनिक तकनीक के साथ अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत करना होगा।

भारत के लिए क्यों अहम है रक्षा आत्मनिर्भरता?

वैश्विक स्तर पर सैन्य खर्च और संघर्षों में बढ़ोतरी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व को और बढ़ा दिया है। युद्ध के दौरान हथियारों, कलपुर्जों, तकनीकी प्रणालियों और अन्य सैन्य संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा रहता है।

ऐसी स्थिति में स्वदेशी तकनीक और संसाधनों पर आधारित सैन्य व्यवस्था भारत को अधिक स्वतंत्रता दे सकती है। इससे न केवल रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी, बल्कि संकट के समय परिचालन क्षमता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 में नौसेना प्रमुख का संदेश स्पष्ट रहा कि भारत को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहना होगा। वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर नौसेना का लक्ष्य इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

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