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UP में बच्चों के कफ सिरप अब केवल डॉक्टर के पर्चे पर मिलेंगे; FSDA Guidelines जारी, सख्त निगरानी के निर्देश

On: October 7, 2025
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UP में बच्चों के कफ सिरप अब केवल डॉक्टर के पर्चे पर मिलेंगे, FSDA Guidelines जारी, सख्त निगरानी के निर्देश
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लखनऊ (Tue, 07 Oct 2025) — उत्तर प्रदेश में अब बच्चों के लिए मिलने वाले कफ सिरप डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं खरीदे जा सकेंगे। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने दवा दुकानों पर निगरानी बढ़ाने और आम लोगों को जागरूक करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कदम राजस्थान और मध्य प्रदेश में कथित तौर पर कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है।

डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य, दवा दुकानों पर बढ़ी सख्ती

FSDA की आयुक्त रोशन जैकब ने सभी औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे दवा दुकानदारों को स्पष्ट रूप से बता दें कि बच्चों के कफ सिरप की बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जाए।
साथ ही जनता को भी यह संदेश दिया गया है कि वे दवाएं केवल वैध मेडिकल स्टोर्स से खरीदें, खरीदते समय बिल, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें।

जैकब ने कहा कि “जनसुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई भी नकली या हानिकारक दवा बच्चों तक न पहुंचे।”

कफ सिरप निर्माण इकाइयों की होगी गहन जांच

FSDA Guidelines के तहत प्रदेशभर में दवा निर्माण इकाइयों की समय-समय पर जांच की जाएगी। औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्माण प्रक्रिया, प्रयोग किए गए रासायनिक तत्वों और उनके स्रोतों की पड़ताल करें।
खास ध्यान इस बात पर रहेगा कि सिरप में डाइथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol) जैसे हानिकारक रसायनों की मिलावट तो नहीं की जा रही है।

आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि “यदि किसी दवा या सिरप में मानक से अलग तत्व पाए गए, तो संबंधित फर्मों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

फर्जी लाइसेंस और गलत निर्माण पर FIR का आदेश

FSDA ने चेतावनी दी है कि फर्जी पते पर दवा निर्माण या बिना अनुमति के बिक्री करने वालों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
औषधि निरीक्षक न केवल दुकानों बल्कि अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता की भी जांच करेंगे।

लोगों को दी जा रही चेतावनी और जागरूकता अभियान

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि घर में रखी पुरानी खांसी-बुखार की दवाओं की एक्सपायरी डेट अवश्य जांच लें।
इसके अलावा, इन दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार इंटरनेट मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए किया जाएगा ताकि हर नागरिक तक सही जानकारी पहुंच सके।

राजस्थान और मध्य प्रदेश की घटनाओं के बाद बढ़ी सतर्कता

हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामलों ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी थी। इसके बाद यूपी सरकार ने एहतियातन राज्य में इस पर कड़ी निगरानी का फैसला लिया।
FSDA का यह कदम न सिर्फ सुरक्षा उपाय है, बल्कि यह संदेश भी है कि बच्चों की सेहत से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निष्कर्ष

FSDA Guidelines का उद्देश्य साफ है — जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और दवा उद्योग को जवाबदेह बनाना।
अब यह जिम्मेदारी दवा दुकानदारों और उपभोक्ताओं दोनों की है कि वे इस दिशा-निर्देश का पालन करें, ताकि कोई भी बच्चा असुरक्षित दवा का शिकार न बने।

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