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कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर कीमत में रिकॉर्ड उछाल: दिल्ली में 3071.50 रुपये, खाने की थाली पर बढ़ेगा असर

On: May 1, 2026
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कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर कीमत में रिकॉर्ड उछाल दिल्ली में 3071.50 रुपये
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नई दिल्ली, 1 मई 2026। ऊर्जा बाजार में उठी हलचल अब सीधे आम आदमी की थाली तक पहुंचती दिख रही है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर कीमत में शुक्रवार को हुई ऐतिहासिक बढ़ोतरी ने होटल-रेस्तरां से लेकर छोटे ढाबों तक की गणित बिगाड़ दी है।

सरकारी तेल कंपनियों—Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited—ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर पर एक झटके में 993 रुपये बढ़ा दिए हैं। इसके बाद राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत 3,071.50 रुपये प्रति सिलेंडर पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर कीमत में उछाल: तीन महीने में 1303 रुपये की बढ़ोतरी

अगर पिछले तीन महीनों का ट्रेंड देखें, तो तस्वीर और भी चिंताजनक बन जाती है।

  • मार्च 2026: +114.50 रुपये
  • अप्रैल 2026: +195.50 रुपये
  • मई 2026: +993 रुपये

यानी महज तीन महीनों में कुल 1,303 रुपये की वृद्धि।

इस तेज उछाल ने खासतौर पर छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। लखनऊ के एक ढाबा संचालक ने कहा, “अब या तो दाम बढ़ाएं या घाटा सहें—दोनों ही हालात मुश्किल हैं।”

आम लोगों पर असर: महंगी होगी बाहर खाने की आदत

कमर्शियल सिलेंडर का सीधा इस्तेमाल होटल, रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसाय में होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर सीधे खाने-पीने की चीजों पर पड़ेगा।

  • थाली की कीमत बढ़ सकती है
  • स्ट्रीट फूड महंगा हो सकता है
  • छोटे रेस्टोरेंट्स पर मार्जिन घटेगा

यानी आने वाले दिनों में बाहर खाना अब थोड़ा और महंगा अनुभव बन सकता है।

छोटे सिलेंडर भी महंगे, लेकिन घरेलू गैस अभी स्थिर

5 किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर की कीमत भी 261 रुपये बढ़ा दी गई है, जो आमतौर पर मजदूरों, छात्रों और छोटे परिवारों द्वारा उपयोग किए जाते हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन बाजार संकेत दे रहे हैं कि यह स्थिरता ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकती।

क्यों बढ़ी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर कीमत?

इस उछाल की जड़ें अंतरराष्ट्रीय बाजार में छिपी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz में आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है।

  • भारत अपनी लगभग 60% एलपीजी जरूरतें आयात करता है
  • इसमें से 90% सप्लाई हॉर्मुज मार्ग से आती है
  • ब्रेंट क्रूड की कीमत 100–120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रुपये की विनिमय दर के दबाव के चलते यह बढ़ोतरी अनिवार्य हो गई थी।

आंकड़ों में समझिए एलपीजी का दबाव

  • कुल एलपीजी खपत (FY 2025-26): 3.321 करोड़ टन
  • घरेलू खपत हिस्सा: 86.9%
  • कमर्शियल/इंडस्ट्रियल हिस्सा: ~13%
  • घरेलू उत्पादन: 1.31 करोड़ टन
  • कुल एलपीजी कनेक्शन: 33 करोड़+

मार्च 2026 में खपत में भी गिरावट दर्ज हुई:

  • कुल एलपीजी खपत: -13%
  • घरेलू सिलेंडर बिक्री: -8.1%
  • कमर्शियल बिक्री: -48%

यह संकेत देता है कि महंगाई का असर मांग पर भी पड़ने लगा है।

सरकार की रणनीति: PNG और वैकल्पिक उपायों पर जोर

स्थिति को संभालने के लिए सरकार अब कई मोर्चों पर काम कर रही है—

  • पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क का विस्तार
  • रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को बढ़ाना
  • सप्लाई स्रोतों का विविधीकरण

इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को सब्सिडी जारी है। पिछले वित्त वर्ष में करीब 30,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी।

ब्लैक मार्केटिंग का खतरा बढ़ा

दिल्ली में कमर्शियल और घरेलू सिलेंडर के बीच लगभग 2,000 रुपये का अंतर हो चुका है। इससे एक नई समस्या जन्म ले रही है—

  • घरेलू सिलेंडर का कमर्शियल उपयोग
  • ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग

इसी खतरे को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों और राज्यों के साथ बैठक कर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं।

निष्कर्ष: वैश्विक संकट का स्थानीय असर

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर कीमत में यह उछाल केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस कड़ी का हिस्सा है जो वैश्विक भू-राजनीति से लेकर आम आदमी की थाली तक जुड़ी हुई है।

यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में यह महंगाई और गहराई तक असर डाल सकती है—चाहे वह रसोई हो या बाजार।

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