लखनऊ | 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) — दीपावली के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के पारंपरिक कुम्हार समुदाय को बड़ी सौगात दी है। अब Pottery Art से जुड़े कारीगरों को मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए बिना आवेदन ही जमीन या तालाब का पट्टा दिया जाएगा। सरकार का यह निर्णय न केवल परंपरा को संजीवनी देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान करेगा।
माटी कला को नई उड़ान
राज्य सरकार ने यह आदेश पारंपरिक माटी कला बोर्ड के प्रस्ताव पर जारी किया है। प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद ने बुधवार को शासनादेश जारी करते हुए सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन गांवों में एक भी कुम्हार इस कला को जीवित रखे हुए है, वहां उसे स्वतः भूमि का पट्टा उपलब्ध कराया जाए।
चकबंदी मैनुअल के पैरा 178 के तहत यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
इस निर्णय के साथ ही प्रदेश के सभी 822 ब्लॉकों के 97,941 गांवों में यह नीति लागू हो जाएगी। अब किसी कुम्हार को मिट्टी की उपलब्धता के लिए न तो विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे और न ही आवेदन देना होगा।
रोजगार और सम्मान दोनों बढ़ेंगे
माटी कला बोर्ड के योजना अधिकारी एल.के. नाग ने बताया कि इस प्रस्ताव पर पिछले वर्ष विचार किया गया था और 9 अक्टूबर 2025 को सरकार ने इसे मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि यह कदम ग्रामीण स्तर पर Pottery Art को पुनर्जीवित करेगा और हजारों परिवारों को आत्मनिर्भर बनाएगा।
राजधानी लखनऊ के चिनहट क्षेत्र के कुम्हार राजेश प्रजापति ने खुशी जाहिर करते हुए कहा,
“हमारे गांव लौलाई में मिट्टी की खुदाई को लेकर अक्सर विवाद होता था। अब सरकार ने कारीगरों को अधिकार दिया है, जिससे हमारी कला फिर से फलेगी-फूलेगी।”
“कारीगरों के सम्मान का निर्णय”
डॉ. एस.के. पांडेय, नोडल अधिकारी, माटी कला बोर्ड ने कहा,
“यह शासनादेश उन पारंपरिक कारीगरों के लिए बड़ी राहत है जो वर्षों से मिट्टी कला को जिंदा रखे हुए हैं। अब उन्हें मिट्टी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, चाहे वे गांव में हों या शहर में।”
सरकार की यह पहल न केवल एक पारंपरिक कला को संरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि ‘माटी से जुड़ी कला ही आत्मनिर्भर भारत की आत्मा है।’












