लखनऊ, 27 अक्टूबर 2025। दीपावली की रौनक थमने के बाद सोमवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर जनता के बीच पहुंचे। गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेशभर से आए लोगों की फरियादें खुद सुनीं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया – “हर पीड़ित को समयबद्ध न्याय मिलना चाहिए।”
करीब पचास से अधिक लोगों ने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद किया। कोई पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली से परेशान था तो कोई आर्थिक मदद की आस लिए आया था। मुख्यमंत्री ने सभी को धैर्यपूर्वक सुना और अफसरों से कहा कि “समस्याओं का समाधान केवल कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर दिखना चाहिए।”
गरीबों के इलाज में नहीं होगी देरी, हर ज़रूरतमंद को मिलेगी सहायता
‘जनता दर्शन’ के दौरान एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और इलाज का खर्च नहीं उठा पा रहा। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल अस्पताल से एस्टिमेट रिपोर्ट बनवाने के निर्देश दिए और कहा कि,
“धन के अभाव में किसी का इलाज अधूरा नहीं रहेगा। सरकार हर ज़रूरतमंद के साथ खड़ी है।”
साथ ही, मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी जमीनों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया कि शिकायत की तुरंत जांच कर कार्रवाई की जाए।
“मैं लोकगीत कलाकार हूं सर, मंच दिला दीजिए” – सीएम ने दिलाया कार्यक्रम का मौका
कार्यक्रम में एक महिला लोकगीत कलाकार भी पहुंचीं। उन्होंने सीएम योगी से कहा, “सर! मैं कलाकार हूं, सांस्कृतिक कार्यक्रम करना चाहती हूं, बस मंच का अवसर दिलवा दीजिए।”
मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए तुरंत अधिकारियों को आदेश दिया कि उन्हें आगामी सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा,
“प्रदेश की लोककलाएं हमारी पहचान हैं। सरकार का उद्देश्य यही है कि हर जिले में स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और परंपरा जीवित रहे।”
पुलिस व पारिवारिक विवादों पर भी हुई सुनवाई
कार्यक्रम में कई लोग पुलिस से जुड़े विवादों और पारिवारिक मामलों को लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने संबंधित अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि हर शिकायत का निष्पक्ष और त्वरित निस्तारण हो। उन्होंने कहा कि जनता के भरोसे पर खरा उतरना ही प्रशासन का असली दायित्व है।
निष्कर्ष: जनता से सीधा संवाद, संवेदनशील शासन की मिसाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह जनता दर्शन कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि उनकी जनसेवा की भावना का प्रमाण बन गया है। चाहे इलाज के लिए आर्थिक मदद हो, कला के लिए मंच या प्रशासनिक न्याय — हर दिशा में उनकी पहल ने जनता को यह भरोसा दिया कि सरकार उनकी आवाज़ सुन रही है।








