गोरखपुर, सोमवार 10 नवंबर 2025 — लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर गोरखपुर में निकली एकता यात्रा (Ekta Yatra) में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा बयान दिया जिसने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को नई दिशा दे दी। मंच से मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा—
“कोई भी मजहब राष्ट्र से बढ़कर नहीं हो सकता। राष्ट्र सर्वोपरि है, बाकी सब उसके बाद।”
मुख्यमंत्री योगी का यह वक्तव्य केवल एक राजनीतिक संदेश नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक एकता की पुकार जैसा लगा। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गीत भारत की आत्मा में बसता है और इसे बदलने का कोई प्रयास कभी सफल नहीं हो सकता।
‘वंदे मातरम्’ पर विवाद को लेकर सीएम का पलटवार
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सांसद द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के गायन से इनकार करने की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा —
“जो लोग जिन्ना को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में जाते हैं, वे सरदार पटेल की जयंती पर नदारद रहते हैं। यह दोहरी मानसिकता है, जो राष्ट्र को कमजोर करती है।”
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज समय है यह तय करने का कि देश के लिए कौन खड़ा है और कौन समाज को बांटने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आगाह किया कि “जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर नए जिन्ना पैदा करने की साजिशें फिर से हो रही हैं। अगर कोई जिन्ना पैदा होने का साहस करे, तो उसे चुनौती बनने से पहले ही दफन कर देना होगा।”
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, और जिसने आज़ादी के आंदोलन में लाखों भारतीयों को एक सूत्र में पिरोया था।
देशभक्ति और सांस्कृतिक एकता का उत्सव बना गोरखपुर
गोरखपुर शहर सोमवार की सुबह देशभक्ति के रंगों से सराबोर नजर आया।
नगर निगम मुख्य द्वार से लेकर काली मंदिर तक का पूरा मार्ग भगवा और तिरंगे रंग की झालरों से सजा था। गोलघर की गलियां फूलों से महक रही थीं और हर कोने से “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के स्वर गूंज रहे थे।
मुख्यमंत्री का काफिला जैसे ही गोलघर की ओर बढ़ा, लोगों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बच्चे तिरंगे झंडे लहरा रहे थे, महिलाएं छतों से नारे लगा रही थीं — “योगी जी जिंदाबाद”, “सरदार पटेल अमर रहें”।
पूरे शहर का माहौल ऐसा था जैसे कोई राष्ट्रीय पर्व मनाया जा रहा हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काली माता मंदिर में दर्शन के बाद सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप, लोकनृत्यों की प्रस्तुति और नारंगी गुब्बारों से सजे मंच ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
भाजपा की ‘एकता पदयात्रा’ 20 नवंबर तक जारी रहेगी। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता गांवों, गलियों और नगरों में जाकर सरदार पटेल के योगदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएंगे।
राजनीतिक संदेश से आगे – एक वैचारिक अपील
योगी आदित्यनाथ का यह भाषण केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। यह उस वैचारिक धारणा का पुनर्स्मरण था, जो भारत को विविधता में एकता का प्रतीक बनाती है। उनका संदेश था कि धर्म, जाति और मत के ऊपर अगर कुछ सर्वोच्च है, तो वह है राष्ट्र की अखंडता और एकता।
एकता यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे सरदार पटेल के आदर्शों से प्रेरणा लें और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत बनाएं।
🔖 Conclusion (Journalistic Insight):
गोरखपुर की यह एकता यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस वैचारिक यात्रा का प्रतीक बन गई है, जिसे सरदार पटेल ने अपने जीवन से परिभाषित किया था। योगी आदित्यनाथ का संदेश— “राष्ट्र से बढ़कर कोई मजहब नहीं”— न केवल एक राजनीतिक बयान है, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतिध्वनि है जो भारत की अस्मिता को नई ऊर्जा देती है।












