लखनऊ, (Thu, 13 Nov 2025)। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने जनजातीय समाज के लिए जो काम किया है, वह केवल योजनाओं की सूची भर नहीं बल्कि दशकों की उपेक्षा को मिटाकर सम्मान की पुनर्स्थापना का व्यापक प्रयास है। Tribal Development को शासन की प्राथमिकता बनाते हुए सरकार ने थारू, बुक्सा, भोटिया, राजी, गोंड, बैगा, सहरिया, मुसहर, चेरो समेत 11 लाख से अधिक जनजातीय लोगों के जीवन में बुनियादी और स्थायी बदलाव दर्ज किए हैं।
लंबे समय तक जंगलों, पहाड़ियों और दूरस्थ इलाकों में रहने वाली इन जनजातियों के लिए पहली बार योजनाएँ सिर्फ बनी नहीं, बल्कि उनके दरवाज़ों तक पहुंचीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह स्पष्ट मत रहा है कि विकास वही है, जिसमें “अंत्योदय से सर्वोदय” तक का रास्ता साफ दिखे। इसी सोच के तहत वनाधिकार से लेकर आवास, शिक्षा से आजीविका और संस्कृति से रोजगार तक—हर स्तर पर जनजातीय समाज को संरक्षण और अवसर दोनों दिए गए।
आवास, वनाधिकार और मूलभूत सुविधाएँ—सुरक्षा और स्थायित्व की मजबूत नींव
प्रदेश में जनजातियों को वनाधिकार अधिनियम के तहत पट्टे दिए गए, जिससे न सिर्फ उनके घर कानूनी सुरक्षा के दायरे में आए बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर देकर जीवन में स्थिरता का नया अध्याय जोड़ा गया।
पीएम जनमन योजना ने पहली बार इन इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क, बिजली और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाएँ ऐसी पहुंचाईं, जैसे किसी ने इन गांवों की धड़कनें फिर से चालू कर दी हों।
विशेष रूप से बुक्सा जनजाति के 815 परिवारों को हर सुविधा से संतृप्त कर सरकार ने सामाजिक न्याय का उदाहरण पेश किया।
‘धरती आबा अभियानों’ ने जनजातीय गांवों को किया विकसित
‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘धरती आबा जनभागीदारी अभियान’ ने जमीनी स्तर पर विकास की परिभाषा बदल दी।
26 जिलों के 517 गांवों में:
- कनेक्टिविटी सुधार
- आयुष्मान कार्ड
- उज्ज्वला
- जनधन
- किसान सम्मान निधि
- विश्वकर्मा योजना
जैसी योजनाओं का सैचुरेशन कराया गया।
सोनभद्र, ललितपुर, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी और बलरामपुर के गांवों में इसका प्रभाव साफ दिख रहा है, जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं।
संस्कृति और हस्तशिल्प—विरासत से रोजगार का पुल
थारू समुदाय की अनोखी संस्कृति और कला के संरक्षण के लिए बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू संग्रहालय तैयार हुआ। मिर्जापुर, सोनभद्र और महराजगंज में भी संग्रहालय तेजी से आकार ले रहे हैं।
लखीमपुर खीरी में स्थापित थारू हस्तशिल्प कंपनी ने 371 समूहों को आजीविका से जोड़ा। उन्हें रिवॉल्विंग और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड दिए गए, जिससे यह समुदाय आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
Tribal Development का सबसे मजबूत स्तंभ—शिक्षा
एकलव्य मॉडल स्कूल, आश्रम पद्धति विद्यालय और सर्वोदय छात्रावास ने जनजातीय बच्चों के भविष्य को नई दिशा दी है।
लखीमपुर खीरी, बहराइच, ललितपुर और सोनभद्र के एकलव्य विद्यालय दूरदराज के इलाकों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री का मानना है कि “शिक्षा ही वह आधार है, जो जनजातीय समाज को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा”—और इसी सोच के साथ शिक्षा पर भारी निवेश हुआ है।
युवाओं को रोजगार—सरकारी नौकरियों में नई शुरुआत
सरकार का दावा है कि पुलिस भर्ती में जनजातीय वर्ग की आरक्षित सीटें पहली बार 100% भरी गईं।
परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना के तहत 6,500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और 700 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
राज्य में आठ उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों ने ST वर्ग के युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ा है।
विमुक्त और घुमंतू समुदायों तक भी पहुँचा सुरक्षा और सम्मान का दायरा
नट, बंजारा, सांसी, कंजर, कालबेलिया जैसे समुदायों के लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय, 9 सर्वोदय विद्यालय और कई छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।
इन समुदायों को आवास, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका से जोड़कर सरकार ने उन्हें सम्मानजनक जीवन का हक दिलाया है।












