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योगी सरकार का लक्ष्य: उत्तर प्रदेश को AI और फ्यूचर स्किल्स का राष्ट्रीय हब बनाना

On: January 20, 2026
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योगी सरकार का लक्ष्य: उत्तर प्रदेश को AI और फ्यूचर स्किल्स का राष्ट्रीय हब बनाना
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लखनऊ (20 जनवरी 2026)। उत्तर प्रदेश अब केवल आबादी और कृषि का राज्य नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक और डिजिटल टैलेंट का केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत योगी सरकार ने स्पष्ट लक्ष्य तय कर लिया है— उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फ्यूचर स्किल्स का राष्ट्रीय हब बनाना

इसी दिशा में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग लगातार ठोस और ज़मीनी कदम उठा रहा है। सरकार का फोकस केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगारोन्मुखी स्किल डेवलपमेंट, एआई इनोवेशन और इंडस्ट्री-रेडी टैलेंट तैयार करने पर है।

उत्तर प्रदेश AI हब: इंडस्ट्री, सरकार और शिक्षा का संगम

मंगलवार को लखनऊ में सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस के तत्वावधान में आयोजित स्टेट-लेवल एआई-लेड इनोवेशन एंड कैपेसिटी बिल्डिंग कॉन्फ्रेंस में इस विजन की झलक साफ दिखाई दी। सम्मेलन में देश-विदेश की दिग्गज टेक कंपनियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।

प्रमुख सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुराग यादव ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एआई इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करना, युवाओं और सरकारी अधिकारियों की डिजिटल दक्षता बढ़ाना और उद्योग-जगत व शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग विकसित करना है।

सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किल्स, फ्यूचर स्किल्स, क्षमता निर्माण और रोजगार सृजन जैसे अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई।

माइक्रोसॉफ्ट से गूगल तक, दिग्गज कंपनियों ने साझा किया अनुभव

सम्मेलन में माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, एचसीएल, गूगल, इंटेल और वाधवानी फाउंडेशन जैसी वैश्विक कंपनियों ने एआई आधारित समाधानों, डिजिटल इकोसिस्टम और इंडस्ट्री-रेडी टैलेंट पर अपने अनुभव साझा किए। इन कंपनियों ने प्रेजेंटेशन और केस स्टडी के माध्यम से बताया कि किस तरह एआई भविष्य की नौकरियों और शासन प्रणाली को बदल रहा है।

वहीं NVIDIA, IBM, Red Hat, सिफी टेक्नोलॉजीज और 1M1B (वन मिलियन फॉर वन बिलियन) फाउंडेशन ने क्लाउड कंप्यूटिंग, ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म पर अपने विचार रखे।

‘भाषिणी’ प्लेटफॉर्म पर विशेष फोकस

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में भारत सरकार के ‘भाषिणी’ प्लेटफॉर्म पर विशेष प्रस्तुति दी गई। इसमें बहुभाषी डिजिटल सशक्तिकरण और नागरिक सेवाओं में भाषा प्रौद्योगिकी की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि भाषिणी जैसे प्लेटफॉर्म उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में शासन और सेवाओं को आम नागरिक तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

10 लाख लोगों को AI साक्षर बनाने का बड़ा लक्ष्य

सम्मेलन का एक अहम पड़ाव रहा सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस और नासकॉम के बीच हुआ एमओयू। नासकॉम फ्यूचर स्किल्स प्राइम कार्यक्रम के तहत यह समझौता प्रदेश के युवाओं को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने में मील का पत्थर माना जा रहा है।

नासकॉम की सीईओ डॉ. अभिलाषा गौर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टैलेंट और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। सही दिशा और प्रशिक्षण के साथ यह राज्य देश का डिजिटल पावरहाउस बन सकता है।

सम्मेलन के अंतिम सत्र में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने ‘एआई प्रज्ञा’ पहल प्रस्तुत की। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के 10 लाख नागरिकों को एआई साक्षरता से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि वे भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

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