लखनऊ | बुधवार, 21 जनवरी 2026: लोकतंत्र के मूल्यों, संवाद की परंपरा और जनभागीदारी की ताकत को रेखांकित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद के प्रति श्रद्धा केवल संवैधानिक भावना नहीं, बल्कि हर भारतवासी का नैतिक दायित्व है।
विधायिका लोकतंत्र की आधारशिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र की वह आधारभूत इकाई है, जहां से न केवल कानूनों का निर्माण होता है, बल्कि देश और प्रदेश के समग्र विकास की दिशा भी तय होती है। उन्होंने संविधान के तीन मूल शब्द—न्याय, समता और बंधुता—का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भारत के लोकतंत्र की आत्मा हैं। न्याय के लिए कानून, समता के लिए नीतियां और बंधुता के लिए संवाद—इन तीनों का संगम विधायिका के मंच पर दिखाई देता है।
संसद से मिलती है लोकतांत्रिक प्रेरणा
सीएम योगी ने कहा कि भारत की संसद दुनिया के लिए एक मिसाल है। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज संसद तक पहुंचती है। पांच बार लोकसभा सदस्य रह चुके मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि संसद में रहते हुए उन्होंने सीखा कि किस तरह नियमों, मर्यादाओं और संवाद के जरिए लोकतंत्र को जीवंत रखा जाता है। उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद को संसद की कार्यप्रणाली से सीख लेने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
‘संसद के प्रति श्रद्धा’ क्यों जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हम अपने लोकतांत्रिक संस्थानों को आदर्श के रूप में विकसित करेंगे, तो विधायिका और अधिक सशक्त होगी। संसद के प्रति श्रद्धा केवल औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। उन्होंने प्रश्नकाल में सुधार, नियमावली में बदलाव और अधिक जनप्रतिनिधियों की सहभागिता जैसे उदाहरणों के जरिए बताया कि सकारात्मक बदलाव कैसे लाए जा सकते हैं।
विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश पर मंथन
सम्मेलन में पारित छह प्रस्तावों को महत्वपूर्ण बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” केवल एक नारा नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी है। इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के 300 से अधिक सदस्यों ने 24 घंटे तक गहन चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि देर रात तक सदन में विचार-विमर्श चलता रहा और अनेक व्यावहारिक सुझाव सामने आए, जो भविष्य की नीतियों की दिशा तय करेंगे।
ई-विधान और 30 बैठकों के प्रस्ताव की सराहना
मुख्यमंत्री ने वर्ष में कम से कम 30 बैठकों के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल संसद और विधानसभा के लिए नहीं, बल्कि नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। उन्होंने ई-विधान व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा, विधान परिषद, कैबिनेट और बजट की कार्यवाही अब पूरी तरह पेपरलेस हो चुकी है।
98 लाख सुझाव, जनता की सीधी भागीदारी
सीएम योगी ने बताया कि “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” विजन डॉक्यूमेंट के लिए जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए, जिनमें 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। आईआईटी कानपुर के सहयोग से एआई टूल्स के जरिए इन सुझावों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि उन्हें अंतिम विजन डॉक्यूमेंट का हिस्सा बनाया जा सके।
संतुलन और संवाद की मिसाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीठ और सरकार का दृष्टिकोण हमेशा प्रोएक्टिव होना चाहिए, न कि रिएक्टिव। पीठ का दायित्व है कि वह पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखे। उन्होंने सम्मेलन को ‘सीखो-सिखाओ’ का प्रभावी मंच बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर ओम बिरला, हरिवंश, सतीश महाना और कुंवर मानवेंद्र सिंह सहित देशभर से आए पीठासीन अधिकारी और अतिथिगण उपस्थित रहे।








