राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

उत्तर प्रदेश कम्प्लायंस रिडक्शन में नंबर वन, फेज-II में भूमि, निर्माण और ऊर्जा सेक्टर में बड़े सुधार

On: January 22, 2026
Follow Us:
उत्तर प्रदेश कम्प्लायंस रिडक्शन में नंबर वन
---Advertisement---

लखनऊ | 22 जनवरी 2026 (गुरुवार): उत्तर प्रदेश ने कम्प्लायंस रिडक्शन के क्षेत्र में देश में नई पहचान बनाई है। अब राज्य सरकार इस पहल को अगले चरण में ले जाते हुए डी-रेगुलेशन फेज-II के तहत व्यापक और संस्थागत सुधार लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इस संबंध में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर सुधार का असर जमीन पर दिखना चाहिए और आम नागरिक को व्यवस्था सरल होती महसूस होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य नागरिकों और उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं, अनुमतियों और निरीक्षणों से राहत देकर भरोसे पर आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध प्रशासन उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डी-रेगुलेशन का अर्थ नियंत्रण समाप्त करना नहीं, बल्कि अनावश्यक नियंत्रण हटाकर जरूरी नियमों को सरल और प्रभावी बनाना है।

बैठक में जानकारी दी गई कि कैबिनेट सचिवालय द्वारा जनवरी 2026 में जारी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को कम्प्लायंस रिडक्शन फेज-I में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। अब फेज-II के अंतर्गत 9 थीम, 23 प्रायोरिटी एरिया और 5 ऑप्शनल प्रायोरिटी एरिया चिन्हित कर चरणबद्ध सुधार लागू किए जा रहे हैं।

भूमि उपयोग और निर्माण प्रक्रियाओं में बड़ा बदलाव

भूमि उपयोग से जुड़े मामलों में किसानों और भू-स्वामियों को राहत देने पर विशेष फोकस किया गया है। ‘चेंज इन लैंड यूज’ जैसी जटिल अनुमतियों को समाप्त करने या सरल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। नियोजित क्षेत्रों में मास्टर प्लान के अनुरूप मामलों में अलग से अनुमति की आवश्यकता समाप्त करने और अनियोजित क्षेत्रों में भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी है।

भवन निर्माण क्षेत्र में नक्शा पास कराने, लेआउट अप्रूवल और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं को रिस्क-बेस्ड सिस्टम पर लाया जा रहा है। सेल्फ-सर्टिफिकेशन और डीम्ड अप्रूवल को बढ़ावा देकर आम नागरिकों और बिल्डर्स को अनावश्यक देरी से राहत देने का लक्ष्य है।

एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलेगी सुविधा

विभिन्न विभागों की अनुमतियों और यूटिलिटीज सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। इससे उद्योगों और संस्थानों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और हर प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा तय होगी। यह कदम पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।

ऊर्जा और पर्यावरण सेक्टर में सरल प्रक्रियाएं

ऊर्जा क्षेत्र में बिजली कनेक्शन, लोड बढ़ाने और अन्य तकनीकी अनुमतियों की प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूवल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सके।
पर्यावरण संबंधी मामलों में कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए अनावश्यक क्लीयरेंस हटाकर ट्रस्ट-बेस्ड अप्रोच अपनाई जा रही है, जबकि उच्च जोखिम वाले मामलों में स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया लागू होगी।

पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश को प्रोत्साहन

पर्यटन परियोजनाओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित अनुमतियों को सरल बनाकर निवेश को बढ़ावा देने की योजना है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

इंस्पेक्शन कम, जवाबदेही अधिक

फेज-II के अंतर्गत निरीक्षणों की संख्या घटाने, पुराने और अप्रासंगिक नियमों को समाप्त करने तथा प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटाइज और टाइम-बाउंड बनाने पर काम किया जा रहा है। हर विभाग के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जा रही है, ताकि सुधार केवल कागजों तक सीमित न रहें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सुधार केवल उद्योगों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिक के दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए हैं—चाहे घर बनाना हो, बिजली-पानी कनेक्शन लेना हो या किसी छोटी सेवा से जुड़ी अनुमति।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now