लखनऊ, 6 फरवरी 2026। त्योहारों के मौसम से पहले राज्य सरकार ने ‘चाइनीज मांझा’ पर अब तक की सबसे सख्त चेतावनी जारी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में इस जानलेवा मांझे की एक भी रील न बिके, न कहीं भंडारित हो। उन्होंने कहा कि यदि चाइनीज मांझे से किसी की मृत्यु होती है, तो उसे हत्या मानते हुए कार्रवाई की जाएगी, और संबंधित इलाके का पुलिस प्रशासन भी जवाबदेह माना जाएगा।
सरकार के अनुसार यह केवल प्रतिबंध का मामला नहीं, बल्कि एक मानव-जीवन सुरक्षा का प्रश्न है—क्योंकि यह मांझा कांच-लेपित और धात्विक मिश्रण से बना होता है, जो बाइक सवारों, पैदल राहगीरों और पक्षियों तक के लिए घातक साबित होता रहा है।
थोक से ऑनलाइन तक—पूरे सप्लाई चेन पर नजर
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों को निर्देशित किया है कि थोक विक्रेताओं, गोदामों, परिवहन चैनलों और ऑनलाइन सप्लायर्स की सघन जांच कर अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए। इंटरनेट मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली बिक्री पर भी कड़ी निगरानी के आदेश हैं। हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
पतंग विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि चाइनीज मांझा बेचते पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
स्कूल–कॉलेज में जागरूकता, युवाओं पर खास फोकस
निर्देशों में यह भी शामिल है कि स्कूलों और कॉलेजों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ। बच्चों और युवाओं को बताया जाए कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके उपयोग से गंभीर दुर्घटनाएँ हो सकती हैं। प्रशासन स्थानीय स्तर पर पोस्टर, घोषणाएँ और सामुदायिक संवाद के जरिए संदेश फैलाएगा।
दुर्घटनाएँ क्यों बढ़ाती हैं चिंता
हर साल पतंगबाजी के दौरान गले पर मांझा लगने से बाइक सवारों के घायल होने, राहगीरों के कटने और पक्षियों के मरने की घटनाएँ सामने आती हैं। यही कारण है कि सरकार ने इस बार रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए बिक्री-भंडारण की जड़ पर चोट करने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री का संदेश साफ है—प्रतिबंध कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। जिलों में विशेष अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाजार, गोदाम और ऑनलाइन चैनल—कहीं भी यह मांझा उपलब्ध न हो।








