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गोरखपुर का रंगोत्सव खास: CM योगी के नेतृत्व में भगवान नृसिंह शोभायात्रा

On: March 3, 2026
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CM योगी के नेतृत्व में भगवान नृसिंह शोभायात्रा
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गोरखपुर, 03 मार्च 2026 (मंगलवार)। होली का रंग जब आस्था से मिलता है, तो वह सिर्फ उत्सव नहीं, परंपरा बन जाता है। इस बार भी गोरखपुर का गोरखपुर रंगोत्सव खास होने जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा का नेतृत्व करेंगे।

यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है, जिसकी जड़ें आठ दशक पुरानी परंपरा से जुड़ी हैं।

भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में CM योगी की अगुवाई

घंटाघर से निकलने वाली भगवान नृसिंह की शोभायात्रा दशकों से गोरखपुर की पहचान रही है। श्री होलिकोत्सव समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बैनर तले आयोजित यह शोभायात्रा बुधवार सुबह निकलेगी, जिसकी अगुवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं करेंगे।

गौरतलब है कि 1996 से 2019 तक योगी आदित्यनाथ लगातार इस शोभायात्रा का नेतृत्व करते रहे। वर्ष 2020 और 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण उन्होंने जनस्वास्थ्य की दृष्टि से इसमें भाग नहीं लिया। 2022 से यह परंपरा पुनः उनके नेतृत्व में शुरू हुई और तब से हर वर्ष यह आयोजन पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक विशिष्ट सांस्कृतिक पर्व के रूप में स्थापित हो चुका है।

1944 से चली आ रही परंपरा

भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत वर्ष 1944 में संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने अपने गोरखपुर प्रवासकाल में की थी। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—होली के माध्यम से समाज को एक सूत्र में बांधना।

हालांकि गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से होली खेलने की परंपरा इससे पहले से चली आ रही थी, लेकिन इसे संगठित रूप देने का श्रेय नानाजी देशमुख को जाता है। बाद में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ ने शोभायात्रा में गोरक्षपीठ का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया।

यही वह बिंदु था, जहां से यह आयोजन गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गया। 1996 के बाद योगी आदित्यनाथ ने इसे न केवल गोरखपुर, बल्कि पूरे पूर्वांचल में सामाजिक समरसता का प्रतीक बना दिया।

पांच किलोमीटर की यात्रा, एकता का संदेश

करीब पांच किलोमीटर लंबी यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरती है। पथ-नियोजन संघ के कार्यकर्ता करते हैं। भगवान नृसिंह के रथ पर सवार गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ रंगों में सराबोर होकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हैं और शुभकामनाएं देते हैं।

यह दृश्य अपने आप में अद्भुत होता है—जहां जाति, वर्ग, पंथ और भेदभाव की दीवारें रंगों में घुल जाती हैं। बच्चे, बुजुर्ग, व्यापारी, साधु-संत—सब एक साथ “होली है” के उल्लास में शामिल होते हैं।

गोरखनाथ मंदिर से रंगपर्व की शुरुआत

रंगोत्सव की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से तिलक लगाने के साथ होगी। गोरक्षपीठाधीश्वर के साथ मंदिर के प्रधान पुजारी और अन्य साधु-संत भी भस्म से तिलक कर रंगोत्सव का शुभारंभ करेंगे। मंदिर परिसर में पारंपरिक फाग गीत गूंजेंगे, जो इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाई देते हैं।

दोपहर बाद मुख्यमंत्री के सानिध्य में होली मिलन समारोह का आयोजन भी प्रस्तावित है, जहां विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देंगे।

सामाजिक समरसता का जीवंत संदेश

गोरखपुर रंगोत्सव की खासियत केवल इसकी भव्यता नहीं, बल्कि उसका संदेश है। यहां रंग सिर्फ चेहरे पर नहीं, सोच पर भी चढ़ता है। भक्ति की शक्ति और सामाजिक एकता का यह संगम हर वर्ष हजारों लोगों को जोड़ता है।

कई स्थानीय लोग कहते हैं कि जिस तरह मथुरा-वृंदावन की होली की प्रतीक्षा रहती है, उसी तरह अब गोरखपुर की इस शोभायात्रा का इंतजार होता है।

आस्था, अनुशासन और उत्साह का यह संगम एक बात स्पष्ट करता है—जब परंपरा में नेतृत्व और सामाजिक उद्देश्य जुड़ जाएं, तो वह आयोजन इतिहास बन जाता है।

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