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उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी, भर्ती और पदोन्नति व्यवस्था में बड़ा बदलाव

On: March 10, 2026
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उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी
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लखनऊ, 10 मार्च 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली संशोधन को मंजूरी दे दी गई।

कैबिनेट के इस निर्णय के बाद अब उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की जाएगी। यह संशोधन इलाहाबाद उच्च न्यायालय की संस्तुति के आधार पर तैयार किया गया है। इसके तहत भर्ती प्रक्रिया, पदोन्नति कोटा और चयन प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किया गया है।

उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली संशोधन से भर्ती और चयन प्रक्रिया में बदलाव

सरकार द्वारा मंजूर किए गए उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली संशोधन के तहत नियमों के कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इनमें मुख्य रूप से नियम-5 (भर्ती के स्रोत), नियम-6 (कोटा), नियम-18 (चयन प्रक्रिया), नियम-20 (पदोन्नति), नियम-22 (नियुक्ति) और परिशिष्ट-1 शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि इन बदलावों से न्यायिक सेवा में चयन प्रक्रिया अधिक प्रतिस्पर्धी और संतुलित बनेगी, जिससे योग्य उम्मीदवारों को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

पदोन्नति कोटे में किया गया महत्वपूर्ण बदलाव

संशोधन के अनुसार सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति के जरिए उच्चतर न्यायिक सेवा में जाने वाले अधिकारियों का कोटा घटाकर 65 प्रतिशत से 50 प्रतिशत कर दिया गया है।

यह पदोन्नति वरिष्ठता (seniority), श्रेष्ठता (merit) और उपयुक्तता परीक्षा के आधार पर दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि न्यायिक पदों पर चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और योग्यता आधारित हो।

विभागीय प्रतियोगी परीक्षा का कोटा बढ़ाया गया

नए संशोधन के तहत सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (Limited Departmental Competitive Examination) के जरिए पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।

इस श्रेणी में वही सिविल जज पात्र होंगे जिन्होंने:

  • सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर कम से कम 3 वर्ष की सेवा पूरी की हो
  • और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में न्यूनतम 7 वर्ष की सेवा पूरी की हो

सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक अधिकारियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और प्रतिभाशाली अधिकारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

अधिवक्ताओं से सीधी भर्ती का कोटा यथावत

संशोधन के बावजूद अधिवक्ताओं (बार) से सीधे भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रखा गया है।

इस प्रावधान का उद्देश्य न्यायिक सेवा में अनुभवी अधिवक्ताओं को शामिल करना है, ताकि न्यायिक प्रणाली में व्यावहारिक अनुभव और विविध दृष्टिकोण का समावेश हो सके।

न्यायिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम

विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली संशोधन से न्यायिक सेवा की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया अधिक संतुलित और प्रतिस्पर्धी बनने की संभावना है।

सरकार का कहना है कि न्यायिक संस्थानों की मजबूती किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला होती है। ऐसे में नियमों में समय-समय पर सुधार कर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना जरूरी है।

इस संशोधन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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