लखनऊ (Tue, 10 Mar 2026)। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। सरकार ने बांदा डेयरी प्लांट की स्थापना को मंजूरी देते हुए वहां 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया डेयरी प्लांट स्थापित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही झांसी में पहले से संचालित डेयरी प्लांट की क्षमता को भी तीन गुना तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
इस फैसले को मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा।
बांदा डेयरी प्लांट से बढ़ेगी दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता
सरकार की योजना के तहत बांदा डेयरी प्लांट को प्रतिदिन 20 हजार लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ विकसित किया जाएगा। यह प्लांट बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन और उसके बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा साबित हो सकता है।
वहीं झांसी में पहले से स्थापित 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी प्लांट का विस्तार किया जाएगा। विस्तार के बाद इसकी क्षमता बढ़कर 30 हजार लीटर प्रतिदिन हो जाएगी। इससे क्षेत्र में दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी को मिली जिम्मेदारी
इन दोनों परियोजनाओं के सिविल और मैकेनिकल कार्यों के लिए सरकार ने इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी को कार्यदायी संस्था नामित किया है।
कैबिनेट बैठक में इस संस्था को 12.50 प्रतिशत सेंटेज चार्ज देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। इस मद में होने वाला पूरा खर्च राज्य सरकार अपने संसाधनों से वहन करेगी।
दरअसल, पहले सेंटेज चार्ज की स्वीकृति न मिलने के कारण कार्यदायी संस्था द्वारा स्थल पर काम शुरू नहीं किया जा सका था।
एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से जुड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कृषि और दुग्ध क्षेत्र में उत्पादन तथा प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण के ढांचे को मजबूत करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर दूध का प्रसंस्करण बढ़ेगा तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पहले भी कई परियोजनाओं में मिल चुका है सेंटेज चार्ज
सरकारी जानकारी के अनुसार इससे पहले कानपुर नगर, कन्नौज, फिरोजाबाद, लखनऊ, मुरादाबाद, गोरखपुर, मेरठ, फैजाबाद, बरेली और वाराणसी में स्थापित मल्टी प्रोडक्ट डेयरी फूड परियोजनाओं में भी इसी कार्यदायी संस्था को सेंटेज चार्ज दिया जा चुका है।
इसके अलावा इलाहाबाद, झांसी, अलीगढ़ और पराग डेयरी नोएडा के डेयरी प्लांटों के सुदृढ़ीकरण की परियोजनाओं में भी कैबिनेट की मंजूरी के बाद यही व्यवस्था लागू की गई थी।
दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार का दावा है कि बांदा डेयरी प्लांट और झांसी प्लांट के विस्तार से बुंदेलखंड क्षेत्र में दूध के संरक्षण और प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ेगी। इससे किसानों और दुग्ध उत्पादकों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब स्थानीय स्तर पर दूध की प्रोसेसिंग सुविधा उपलब्ध होती है तो दूध के खराब होने (क्षरण) की संभावना कम होती है, साथ ही उत्पादकों को बेहतर और लाभकारी मूल्य भी मिल पाता है।
इस प्रकार ये दोनों परियोजनाएं न केवल दुग्ध उद्योग को मजबूत करेंगी, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे सकती हैं।









