नई दिल्ली, 11 मार्च 2026। देश में ग्रामीण जल आपूर्ति के क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत अब भारत के लगभग 82 प्रतिशत ग्रामीण घरों में शुद्ध पेयजल के लिए नल का कनेक्शन उपलब्ध हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जब यह मिशन शुरू हुआ था, तब यह सुविधा केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक ही सीमित थी।
बुधवार को आयोजित जल महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में पानी केवल एक बुनियादी आवश्यकता नहीं, बल्कि यह देश की संस्कृति, परंपरा, आजीविका और सामुदायिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उनके मुताबिक जल से जुड़ी पहलों ने ग्रामीण भारत के जीवन स्तर में ठोस बदलाव लाया है।
जल जीवन मिशन से बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जल जीवन मिशन के कारण ग्रामीण परिवारों की दैनिक जिंदगी में बड़ा परिवर्तन आया है। पहले गांवों में स्वच्छ पेयजल तक पहुंच आसान नहीं थी।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों को हर दिन कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था। इससे समय और श्रम दोनों की भारी बर्बादी होती थी। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और स्वच्छ पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है।
राष्ट्रपति ने इसे ग्रामीण भारत में जीवन गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
भारत की संस्कृति और परंपरा में जल का महत्व
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भारतीय संस्कृति में जल के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में जल को जीवन का आधार माना गया है और इसे स्वास्थ्य तथा उपचार से भी जोड़ा जाता रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि देश के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” का पहला शब्द “सुजलाम” है, जिसका अर्थ है जल संसाधनों से समृद्ध भूमि।
राष्ट्रपति के अनुसार यह शब्द केवल एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह भारत की उस ऐतिहासिक सोच को दर्शाता है जिसमें जल को जीवन, समृद्धि और संतुलन का स्रोत माना गया है।
क्या है जल जीवन मिशन?
कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने भी जल जीवन मिशन की प्रगति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत अब तक 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल के पानी के कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2019 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य केवल नल का पानी उपलब्ध कराना नहीं है। इसका लक्ष्य ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधा के नए युग की शुरुआत करना भी है।
पाटिल के अनुसार स्वच्छ जल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों में कमी आने के साथ ही ग्रामीण परिवारों की जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
जल आपूर्ति से स्वास्थ्य और सम्मान दोनों
विशेषज्ञों के मुताबिक घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचने से न केवल स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होते हैं, बल्कि महिलाओं और बच्चों का समय भी बचता है, जिसे वे शिक्षा और अन्य उत्पादक गतिविधियों में लगा सकते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुंचे, ताकि देश के विकास की धारा में कोई भी पीछे न रह जाए।













