लखनऊ (16 मार्च 2026)। उत्तर प्रदेश सरकार ने आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अहम कदम उठाया है। प्रदेश में अत्यंत खतरनाक मानी जाने वाली चूहा मारने की दवा, खासतौर पर रैटोल पेस्ट पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने येलो-व्हाइट फास्फोरस युक्त ऐसे सभी चूहानाशक उत्पादों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
यह फैसला भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से मिली सूचना के आधार पर लिया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे उत्पाद न केवल अवैध हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
खतरनाक रसायन के कारण रैटोल पेस्ट पर रोक
सरकारी अधिकारियों के अनुसार जिन चूहानाशक उत्पादों में येलो-व्हाइट फास्फोरस (Yellow-White Phosphorus) का उपयोग किया जाता है, वे अत्यधिक विषैले होते हैं। इन रसायनों से बने उत्पाद, जिनमें ‘रैटोल पेस्ट’ जैसे नाम शामिल हैं, अधिकतर अनियंत्रित तरीके से बाजार में बिक रहे थे।
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, तीन प्रतिशत येलो-व्हाइट फास्फोरस युक्त पेस्ट को देश में अनुमोदित कीटनाशियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए इनका निर्माण, भंडारण या बिक्री कीटनाशी अधिनियम के तहत अवैध माना जाता है।
इसी वजह से प्रदेश सरकार ने रैटोल पेस्ट पर रोक लगाते हुए जिलों को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से हटाए जाएंगे उत्पाद
सरकार के संज्ञान में आया है कि इस प्रकार के अवैध चूहानाशक उत्पाद कई ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं। इसको देखते हुए संबंधित कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे सभी उत्पादों को तुरंत अपनी सूची से हटाया जाए।
सरकारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऑनलाइन माध्यम से कीटनाशकों की बिक्री केवल वही विक्रेता कर सकेंगे, जिनके पास राज्य के लाइसेंसिंग अधिकारी द्वारा जारी वैध लाइसेंस होगा।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में केवल सुरक्षित और अनुमोदित कीटनाशक ही उपलब्ध हों।
क्यों खतरनाक है येलो फास्फोरस
सरकार ने अपने आदेश में बताया कि येलो फास्फोरस एक अत्यंत विषैला और ज्वलनशील रसायन है। इसकी सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसके सेवन का कोई निश्चित प्रतिविष (एंटीडोट) उपलब्ध नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी बहुत कम मात्रा भी मानव शरीर के लिए घातक साबित हो सकती है और कई मामलों में इससे मृत्यु तक हो सकती है। यही कारण है कि इसके दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने रैटोल पेस्ट पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
जिलों को सख्त कार्रवाई के निर्देश
प्रदेश सरकार ने जिला कृषि रक्षा अधिकारियों और कीटनाशी निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि यदि कहीं भी इन अवैध उत्पादों का भंडारण या बिक्री होती हुई पाई जाए, तो तुरंत कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दोषियों के खिलाफ कीटनाशी अधिनियम 1968 और कीटनाशी नियमावली 1971 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकार का मानना है कि इस प्रतिबंध से न केवल अवैध कीटनाशकों की बिक्री पर लगाम लगेगी, बल्कि लोगों की जान को खतरे में डालने वाले रसायनों के दुरुपयोग को भी रोका जा सकेगा।








