लखनऊ (Mon, 16 Mar 2026)। उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुई SI भर्ती परीक्षा पंडित विवाद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था से जुड़े विषयों पर अमर्यादित टिप्पणी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों और आयोगों के अध्यक्षों को निर्देश दिया है कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन का पूरा ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी सामग्री शामिल न की जाए जिससे किसी वर्ग की भावना आहत हो या अनावश्यक विवाद खड़ा हो।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा में पूछे गए सवाल से शुरू हुआ विवाद
दरअसल शनिवार को आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में एक बहुविकल्पीय प्रश्न पूछा गया था— “अवसर के अनुसार बदलने वाला”। इसके उत्तर विकल्पों में एक विकल्प “पंडित” भी दिया गया था।
इस विकल्प को लेकर सोशल मीडिया और प्रतियोगी छात्रों के बीच विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे जातीय और धार्मिक भावना से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए आपत्ति जताई।
मामला बढ़ने पर भाजपा के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस पर कार्रवाई की मांग की। वहीं उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बार-बार गलती करने वालों पर लगेगा प्रतिबंध
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई पेपर तैयार करने वाला व्यक्ति या संस्था बार-बार इस प्रकार की गलती करती है तो उसे आदतन उल्लंघन करने वाला (Habitual Offender) मानते हुए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियों या विशेषज्ञों के साथ होने वाले एमओयू (MoU) में भी यह प्रावधान शामिल किया जाए, ताकि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बन सके।
सरकार का मानना है कि इससे भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनी रहेगी और अनावश्यक विवादों से भी बचा जा सकेगा।
यूपी पुलिस के सोशल मीडिया संदेश से बढ़ा विवाद
इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की परीक्षा में उठे विवाद के बीच यूपी पुलिस की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने मामले को और तूल दे दिया।
रविवार को यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संदेश जारी कर कहा कि परीक्षा के प्रश्नपत्रों या उनके कंटेंट पर चर्चा, विश्लेषण या प्रसार करना प्रतिबंधित है।
पोस्ट में चेतावनी दी गई कि ऐसा करने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों और कोचिंग संस्थानों ने जताई नाराजगी
यूपी पुलिस के इस संदेश पर प्रतियोगी छात्रों और कोचिंग संस्थानों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करना प्रतियोगी परीक्षा संस्कृति का सामान्य हिस्सा होता है।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने कहा कि जब परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो चुकी है और पेपर लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई, तो छात्रों को प्रश्नपत्रों पर चर्चा करने से रोकना उचित नहीं है।
वहीं समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि अब तक देश के किसी भी भर्ती बोर्ड या आयोग ने परीक्षा खत्म होने के बाद प्रश्नपत्रों के विश्लेषण पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रश्न तैयार करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर भी विचार कर सकते हैं।
भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और विवादमुक्त बनाना उसकी प्राथमिकता है। इसी कारण मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय सामाजिक संवेदनशीलता और मर्यादा का पूरा ध्यान रखा जाए।
सरकार का मानना है कि पारदर्शी और जिम्मेदार परीक्षा व्यवस्था से ही युवाओं का विश्वास भर्ती प्रक्रियाओं पर बना रहेगा।








