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गोरखपुर में सियासी गरज: CM योगी बोले—कांग्रेस और सपा का इतिहास महिला विरोधी

On: April 22, 2026
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गोरखपुर में सियासी गरज, CM योगी बोले—कांग्रेस और सपा का इतिहास महिला विरोधी
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गोरखपुर (Wed, 22 Apr 2026)। पूर्वांचल की राजनीतिक धरती पर बुधवार को माहौल कुछ अलग था—गर्मी सिर्फ मौसम में नहीं, सियासत में भी महसूस हो रही थी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुद्दे पर आयोजित सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला।

मुख्यमंत्री योगी ने साफ शब्दों में कहा कि ये दल महिलाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते। उनके अनुसार, “कांग्रेस और सपा का इतिहास ही महिला विरोधी रहा है।”

योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी ने इस राजनीतिक संदेश को और भी धार दी।

संसद से सड़क तक: महिला आरक्षण पर राजनीति तेज

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में नए संसद भवन में पारित पहला प्रमुख कानून महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल—विशेषकर कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके—इस विधेयक को लागू होते नहीं देखना चाहते।

मुख्यमंत्री योगी के मुताबिक, 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को कानून निर्माण में 33% भागीदारी देने का रास्ता इस अधिनियम से खुलेगा, लेकिन विपक्ष इसे “लटकाने और भटकाने” की राजनीति कर रहा है।

आंकड़ों के साथ सरकार का पक्ष: पुलिस से स्टार्टअप तक महिलाओं की भागीदारी

भाषण के दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के कामकाज का भी विस्तार से जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि 2017 से पहले जहां यूपी पुलिस में महिलाओं की संख्या करीब 10 हजार थी, वहीं अब यह बढ़कर 44-45 हजार तक पहुंच चुकी है। साथ ही, पुलिस भर्ती में 20% महिला आरक्षण अनिवार्य किया गया है।

सरकारी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी, स्टार्टअप्स में उनकी हिस्सेदारी और एमएसएमई सेक्टर में रोजगार सृजन—इन सभी आंकड़ों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि महिला सशक्तिकरण केवल नारे तक सीमित नहीं है।

‘नारी शक्ति अधिकार है, दया नहीं’—योगी का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री ने एक भावनात्मक लेकिन सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार “भीख” में नहीं मिल रहा, बल्कि यह उनका स्वाभाविक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में भारी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि अब आधी आबादी अपने अधिकारों को लेकर सजग और मुखर है।

उनके शब्दों में, “बहुत दिनों तक किसी को भी नारी शक्ति को उसके अधिकार से वंचित रखने की इजाजत नहीं मिलेगी।”

परंपरा और संस्कृति के जरिए संदेश देने की कोशिश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में भारतीय संस्कृति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत की परंपरा में मातृशक्ति को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है—चाहे वह भगवान राम का ‘कौशल्यानंदन’ संबोधन हो या कृष्ण का ‘यशोदानंदन’।

इस तरह उन्होंने सांस्कृतिक संदर्भों के जरिए यह स्थापित करने की कोशिश की कि नारी सम्मान भारत की मूल पहचान का हिस्सा है।

योजनाओं का जिक्र: कन्या सुमंगला से लेकर उज्ज्वला तक

मुख्यमंत्री ने राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को भी गिनाया—जैसे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, सामूहिक विवाह योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और पीएम स्वनिधि।

उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिला है और इससे उनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है।

निष्कर्ष: राजनीतिक बयान या सामाजिक एजेंडा?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर गोरखपुर से दिया गया यह संदेश सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि इसमें सामाजिक बदलाव का दावा भी शामिल था।

हालांकि, विपक्ष इन आरोपों से सहमत हो या नहीं—यह अलग बहस का विषय है। लेकिन इतना तय है कि महिला सशक्तिकरण अब चुनावी राजनीति का एक केंद्रीय मुद्दा बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि यह बहस ज़मीनी बदलाव में कितनी तब्दील होती है और मतदाता इसे किस नजर से देखते हैं।

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