लखनऊ (Tue, 21 Apr 2026)। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल की रफ्तार को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को सचिवालय सेवा के 30 अधिकारियों के तबादले कर दिए। दो दिनों के भीतर 64 आईएएस अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद अब UP Secretariat Transfer की नई सूची जारी की गई है, जिसमें 17 विशेष सचिव और 13 संयुक्त सचिव शामिल हैं। सरकार के इस कदम को महज नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विभागीय कामकाज में नई प्राथमिकताएं तय करने और प्रशासनिक मशीनरी को अधिक चुस्त बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
राजधानी के सरकारी गलियारों में दिनभर इस सूची की चर्चा रही। वजह साफ है—जब इतने कम समय में बड़े पैमाने पर बदलाव होते हैं, तो उसका असर सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विभागों की कार्यशैली, निर्णय प्रक्रिया और आने वाले महीनों की प्रशासनिक दिशा पर भी पड़ता है।
UP Secretariat Transfer में 17 विशेष सचिवों के विभाग बदले
जारी सूची के अनुसार सचिवालय सेवा के 17 विशेष सचिवों के विभागों में बदलाव किया गया है। इनमें कई ऐसे नाम हैं, जिन्हें अहम विभागों से हटाकर नए दायित्व दिए गए हैं।
विनोद कुमार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से सचिवालय प्रशासन भेजा गया है। प्रभात कुमार को चिकित्सा शिक्षा से ऊर्जा विभाग में नई जिम्मेदारी दी गई है। आनंद प्रकाश सिंह को ग्रामीण अभियंत्रण से दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में स्थानांतरित किया गया है। लाल बहादुर यादव को कृषि से उपभोक्ता मामले विभाग भेजा गया है, जबकि विनय कुमार सिंह को पर्यावरण एवं वन से धर्मार्थ कार्य विभाग में तैनाती मिली है।
इसी तरह विनीत प्रकाश को नियुक्ति विभाग से सार्वजनिक उद्यम, जय प्रकाश भारती को सूचना विभाग से खादी एवं ग्रामोद्योग, सुनील कुमार पांडेय को MSME से समाज कल्याण और अनिल कुमार को राजस्व से सहकारिता विभाग में भेजा गया है। वेद प्रकाश त्रिपाठी को गृह से राजनैतिक पेंशन तथा महावीर प्रसाद गौतम को वित्त से सचिवालय प्रशासन विभाग में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा उमा द्विवेदी को संस्कृति से परिवहन, आनंद कुमार राय को चिकित्सा स्वास्थ्य से रेशम विकास, संजय शुक्ला को ऊर्जा से प्रशासनिक सुधार और राजाराम द्विवेदी को राजस्व से लोक सेवा प्रबंधन विभाग में स्थानांतरित किया गया है।
संयुक्त सचिव स्तर पर भी बड़ा फेरबदल
UP Secretariat Transfer की इस सूची में 13 संयुक्त सचिवों के विभाग भी बदले गए हैं। प्रशासनिक नजरिये से यह हिस्सा खास माना जा रहा है, क्योंकि संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी विभागीय समन्वय, फाइल निस्तारण और नीतिगत क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अमिताभ श्रीवास्तव को आवास एवं शहरी नियोजन से गृह विभाग भेजा गया है। दिलीप कुमार शुक्ला को भूतत्व एवं खनिकर्म से पर्यावरण विभाग में तैनाती दी गई है। दुर्गा सिंह को चीनी उद्योग से नमामि गंगे और रवींद्र प्रताप सिंह को पशुधन से सैनिक कल्याण विभाग में भेजा गया है।
चंद्रशेखर मिश्र को चिकित्सा शिक्षा से चिकित्सा स्वास्थ्य, राजेश प्रताप सिंह को PWD से रेशम विकास और धर्मेंद्र कुमार पाठक को PWD से राजस्व विभाग में स्थानांतरित किया गया है। राज कुमार को औद्योगिक विकास से संस्कृति, अजित प्रताप सिंह को सतर्कता से ग्राम्य विकास और उदयवीर सिंह राठौर को परती भूमि विकास से सचिवालय प्रशासन भेजा गया है।
वहीं, कृपा शंकर यादव को न्याय से कार्यक्रम कार्यान्वयन, राजेंद्र कुमार को वित्त से परिवहन और सजीवन को वित्त से गृह विभाग में नई जिम्मेदारी दी गई है।
लगातार तबादलों के क्या हैं मायने
दो दिनों में पहले 64 आईएएस अधिकारियों और फिर 30 सचिवालय अफसरों के तबादले यह संकेत देते हैं कि योगी सरकार प्रशासनिक स्तर पर व्यापक पुनर्संतुलन कर रही है। आमतौर पर ऐसे फेरबदल तब देखने को मिलते हैं, जब सरकार विभागीय प्रदर्शन, समन्वय और नीति क्रियान्वयन को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहती है।
यह भी माना जा रहा है कि जिन विभागों में कार्यभार अधिक है या जहां योजनाओं की गति बढ़ाने की जरूरत है, वहां अनुभवी अधिकारियों की नई तैनाती के जरिए आउटपुट बेहतर करने की कोशिश की जा रही है। सचिवालय स्तर पर बदलाव का असर सीधे-सीधे फैसलों की गति पर पड़ता है, इसलिए इस सूची को हल्के में नहीं देखा जा रहा।
प्रशासनिक संदेश भी, राजनीतिक संकेत भी
इस फेरबदल को केवल स्थानांतरण सूची के रूप में देखना अधूरा होगा। यह संदेश भी है कि सरकार अब विभागों में जवाबदेही, गति और कार्यकुशलता को लेकर अधिक सक्रिय रुख अपना रही है। शासन में बैठे अधिकारी बदलते ही फाइलों की प्राथमिकता भी बदलती है, और यही वजह है कि इस तरह की सूची को सत्ता की कार्यशैली का संकेतक माना जाता है।
फिलहाल, UP Secretariat Transfer की इस नई सूची ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक पुनर्गठन का दौर अभी थमा नहीं है। आने वाले दिनों में इन बदलावों का असर विभागीय कामकाज और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर साफ दिखाई दे सकता है।








