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RTE नामांकन 2026: योगी सरकार सख्त, 25 अप्रैल तक हर हाल में पूरा करें लक्ष्य

On: April 22, 2026
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RTE नामांकन 2026, योगी सरकार सख्त
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लखनऊ, 22 अप्रैल 2026 (बुधवार)। RTE नामांकन 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने रुख कड़ा कर दिया है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के दाखिले में हो रही धीमी प्रगति पर सरकार ने सख्त नाराजगी जताई है।

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने सभी जिलाधिकारियों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 25 अप्रैल 2026 तक हर हाल में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए। आदेश में साफ कहा गया है कि अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

RTE नामांकन 2026: आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

अब तक सामने आए आंकड़े सरकार के लिए चिंता का कारण बने हैं।

  • कुल आवंटन: 1,95,740 सीटें
  • अब तक हुए दाखिले: 1,08,866 बच्चे

यानी लगभग आधे से ज्यादा बच्चों का नामांकन अभी बाकी है। यही वजह है कि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए फील्ड स्तर पर तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों को कहा गया है कि जिन बच्चों का प्रवेश अभी तक नहीं हुआ है, उनकी तत्काल सूची तैयार की जाए और स्कूलों से समन्वय बनाकर बिना देरी दाखिला पूरा कराया जाए।

जमीनी स्तर पर तेज होगी कार्रवाई

सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब यह सिर्फ कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम देने वाला अभियान होगा।

  • हर जिले में दैनिक समीक्षा (daily monitoring) की जाएगी
  • जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा
  • लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा

यह भी निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर प्रक्रिया में देरी या लापरवाही सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई होगी।

RTE नामांकन 2026: सख्ती के पीछे क्या संदेश है?

सरकार की इस सख्ती के पीछे एक स्पष्ट संदेश है—शिक्षा का अधिकार केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए RTE एक बड़ा सहारा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह भी है कि कई बार जानकारी की कमी, स्कूलों की अनिच्छा या प्रशासनिक ढिलाई के कारण बच्चे इस अधिकार से वंचित रह जाते हैं।

यही कारण है कि इस बार सरकार ने समयसीमा तय कर जवाबदेही (accountability) को केंद्र में रखा है।

क्या बदल सकता है इस अभियान से?

अगर निर्धारित समयसीमा तक लक्ष्य पूरा हो जाता है, तो:

  • हजारों गरीब बच्चों को निजी और बेहतर स्कूलों में पढ़ने का मौका मिलेगा
  • शिक्षा में समान अवसर (equal opportunity) की दिशा में ठोस कदम होगा
  • RTE कानून की प्रभावशीलता जमीन पर दिखाई देगी

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