लखनऊ, 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार)। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म नजर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 45 मिनट के अपने विस्तृत संबोधन में विपक्षी दलों—विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस—पर तीखा हमला बोला। उनका अंदाज केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कई जगहों पर भावनात्मक और व्यंग्यात्मक भी दिखा, जो सदन के भीतर चर्चा का केंद्र बना रहा।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत “आधी आबादी” को समर्पित इस सत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए की। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम है। उनके मुताबिक, 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं की भागीदारी को सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि नीति-निर्माण की गुणवत्ता में भी बढ़ाएगा।
“गिरगिट भी शरमा जाए” — विपक्ष पर तीखा तंज
सीएम योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण का विरोध और राज्यों में उसका समर्थन, एक “राजनीतिक पाखंड” (hypocrisy – पाखंड) का उदाहरण है। उन्होंने कहा, “इनके बदलते रंग देखकर गिरगिट भी शरमा जाएगा।” यह टिप्पणी सदन में काफी चर्चा का विषय बनी।
उन्होंने विपक्ष के इस रुख को “जनता के साथ छल” बताते हुए कहा कि जो दल महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं, वही व्यवहार में इसके उलट दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान स्पष्ट रूप से विपक्ष की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता नजर आया।
महिला सशक्तीकरण की योजनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए महिला सशक्तीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों को गिनाया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, जिससे उन्हें योजनाओं का सीधा लाभ मिलना संभव हुआ।
इसी तरह स्वच्छ भारत मिशन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा (dignity – गरिमा) और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, पहले महिलाएं खुले में शौच के लिए मजबूर थीं और कई बार उन्हें असुरक्षा का सामना करना पड़ता था।
वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में 65 लाख से अधिक गरीबों को आवास दिए गए, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं के नाम पर पंजीकृत है। उन्होंने इसे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता (economic empowerment – आर्थिक सशक्तीकरण) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इतिहास के संदर्भ से विपक्ष पर हमला
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा ने मायावती को समर्थन देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की, जबकि नैतिक जिम्मेदारी सपा की थी।
इसके अलावा उन्होंने शाह बानो प्रकरण को कांग्रेस के पतन का एक प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि इस मामले में एक महिला के साथ अन्याय हुआ और कांग्रेस ने “मौलवियों के दबाव में झुकने” का काम किया।
तीन तलाक कानून का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे खत्म करने का प्रयास किया, तब भी विपक्ष ने इसका विरोध किया—जो उनके महिला-विरोधी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री ने सपा शासनकाल के दौरान हुई कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय महिला सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक थी। उन्होंने बदायूं, बुलंदशहर, चिनहट, सुलतानपुर और हापुड़ जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में “देख सपाई, बिटिया घबराई” जैसे नारे आम हो गए थे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 2017 के बाद राज्य में महिला कार्यबल भागीदारी (workforce participation – कार्यबल भागीदारी) 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो नीतिगत बदलावों का परिणाम है।
राजनीतिक संदेश और सामाजिक संकेत
पूरे भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस केवल विपक्ष की आलोचना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे एक व्यापक सामाजिक बदलाव के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। उनका कहना था कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगा।
हालांकि, विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर “राजनीतिक ध्रुवीकरण” (polarization – ध्रुवीकरण) का आरोप लगाया है। सदन के बाहर भी इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी रही, जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में यह विषय और भी राजनीतिक गर्मी पैदा करेगा।
निष्कर्ष
विधानमंडल का यह विशेष सत्र केवल एक विधेयक पर चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रदेश की राजनीति में महिलाओं की भूमिका, सामाजिक बदलाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की नई परतें भी उजागर कीं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर यह बहस आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है—और यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ सदन तक सीमित नहीं, बल्कि जनचर्चा का हिस्सा बनता जा रहा है।










