लखनऊ, 01 मई 2026। मजदूर दिवस 2026 के मौके पर राजधानी में आयोजित श्रमवीर गौरव समारोह ने एक बार फिर श्रमिकों के मुद्दों को केंद्र में ला खड़ा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर न केवल श्रमिकों को सम्मानित किया, बल्कि बीते वर्षों की स्थिति और वर्तमान बदलाव के बीच साफ अंतर भी रेखांकित किया।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा, “जो श्रमिक दूसरों के घरों में इज्जत घर बनाते थे, उनकी अपनी इज्जत सड़कों पर दिखती थी… लेकिन अब ऐसा नहीं है।” यह बयान न केवल भावनात्मक था, बल्कि राज्य की श्रम नीति में आए बदलावों की झलक भी देता है।
श्रमवीर गौरव समारोह में श्रमिकों का सम्मान, योजनाओं का लोकार्पण
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह के दौरान:
- श्रमिकों को प्रमाणपत्र और टूल किट देकर सम्मानित किया गया
- श्रमिक कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ
- अटल आवासीय विद्यालय के मेधावी छात्रों को भी सम्मानित किया गया
कार्यक्रम का माहौल औपचारिक होने के साथ-साथ भावनात्मक भी रहा, जहां श्रमिकों की भूमिका को “राष्ट्र निर्माण की रीढ़” बताया गया।
सीएम योगी का संदेश: “संवेदनशील सरकार से ही बदलती है तस्वीर”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में श्रमिकों के योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि:
- श्रमिक हर मौसम में बिना थके काम करते हैं
- उनके पसीने से ही “धरती सोना उगलती है”
- पहले श्रमिकों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलती थीं
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब श्रमिक सरकार के एजेंडे का हिस्सा बने हैं और यही बदलाव की असली शुरुआत है।
कोरोना काल का जिक्र, मुफ्त राशन और बस सेवा की याद
मुख्यमंत्री ने कोविड काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर श्रमिकों की मदद की:
- लगभग 14 हजार बसें चलाकर श्रमिकों को उनके घर पहुंचाया गया
- सभी के लिए मुफ्त भोजन और आवास की व्यवस्था की गई
- आज भी जरूरतमंदों को फ्री राशन उपलब्ध कराया जा रहा है
उन्होंने इसे “डबल इंजन सरकार” की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
रोजगार और उद्योग पर जोर, यूपी बना ‘ग्रोथ इंजन’
सीएम ने राज्य में रोजगार और औद्योगिक विकास के आंकड़े भी साझा किए:
- पिछले 9 वर्षों में 18,000 से अधिक उद्योग स्थापित हुए
- लगभग 65,000 लोगों को रोजगार मिला
- अब प्रदेश के लोगों को राज्य के भीतर ही रोजगार मिल रहा है
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत “ग्रोथ इंजन” बनकर उभरा है।
“काम के बदले दाम” की सख्ती, श्रमिक हितों पर फोकस
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब श्रमिकों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:
- काम कराने के बाद भुगतान टालने वालों पर सरकारी कार्रवाई होगी
- श्रमिकों के लिए मानदेय में बढ़ोतरी की गई है
- दुर्घटना में मृत्यु पर ₹5 लाख का बीमा कवर देने की योजना
इसके अलावा, लगभग 80 लाख लोगों को ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा भी दी जा रही है।
डिप्टी सीएम और मंत्रियों ने भी रखा पक्ष
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने देसी अंदाज में कहा कि अब श्रमिकों की इज्जत की “पूरी जिम्मेदारी सरकार की है”।
वहीं केशव प्रसाद मौर्य ने 2019 के अर्धकुंभ का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों के पैर धोकर उन्हें सम्मान दिया था—एक ऐसा दृश्य जिसने देशभर में भावनात्मक संदेश दिया।
मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि “मजदूर का बेटा अब मजदूर ही न रहे, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बने।”
बदलती तस्वीर: सम्मान, सुरक्षा और अवसर
मजदूर दिवस 2026 पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह उस बदलाव का प्रतीक बना, जिसमें श्रमिकों को केवल श्रम का साधन नहीं, बल्कि समाज के सम्मानित हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का फोकस अब केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और अवसर देने पर भी है—और यही संदेश इस पूरे आयोजन से स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया।










